भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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११४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

लग्न का अन्तर सूर्य के सामने रखा, शुक्र और सूर्य का'अन्तर शुक्रं के सामने रखा।

इसी प्रकार उसके नीचे दिये प्रत्येक ग्रह का अन्तर निकाल करे चक्र ४ में रखा है।

यही पत्यांशं का गणित आगे दिया है। 2

सब पत्यांश का योग करने से २०"-२३/-१४” आया है । यह अंत का ग्रह बुध

के अंश २०१-२३'-१४” सर्वाधिकांश के बराबर आ'गया ।

ग्रह का धव. बनाना

अभी दित क म पछ = दि. घन पर विपलं

“पल योग २००२३१४7 ७३३९४ विकला १७--३९- २९-१३

यहाँ ध्रुव विपल तक-निकाला है -जिससे दशा'मान में अन्तर न पड़े परन्तु दशा

मान केवल दिन घड़ी पल तक लेता । *

ग्रह दशा साधन

ग्रह दक्षा<ध्रःव,> पत्यांश

दि घः पं. वि. दि. घ. प. वि.

(१) घ्रुव १७ ३९ २९ १३ (२) घ्व १७ ३९ २९ १३

गुरु पत्याश २ १८ ३० > मंगल गत्यांश ० २७ ११

६" ३० ११ ३

१४ २३० २४: ३९

१९ २० 3२ ७७-८४

८ ३० १४ २७

३ ५४ ५ १

८ ४२ १३ २

११४ ४२ १७ ३३

५" ६ ७ ३९

०-२६ ० ० ० °°

० ५८ . णत य UR VL

१५ दि, घः प. विः

ss 3.22 अट rs 5S He काला, मंगल दशा र्त : ११ RS वरे 4

१३० ११: ३०7 ३०.

दशा. दि.- घ. प.- वि. -

४० ४५ २३० ` ९६:

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