सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 126, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें११८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड
धव में प्रत्येक अहू के पत्यांश से .गुणा-करना-पड़ता है वह गौमूत्रिका-क्रम से गुणा | कर लेना चाहिए । प्रत्येक ग्रह के गुणन फल की क्रिया यहाँ देने से अधिक विस्तार
हो जाता. है. इससे .नहीं:दिथा ।
पत्यांश की अंतर्देशा निकालने की दुसरी रीति
( पत्यांश ग्रह दशा मान >९ अंतग्रेंह दशामान ) -:- ३६०८-अंतदेशा दिन घटी पल
जैसे गुरु में गुरु का अंतर “निकालना है तो गुरु. के दशा मान ४०-५५-३९ में गुरु के
दशा मान ४०-४५-३९ का गुणा कर ३६० का भाग देना । फिर गुरु में मंगल की
दशा मान ८-११-४७ का गुणा कर ३६० का भाग देना । इसी प्रकार प्रत्येक ग्रह |
केः दशा मान का' गुणा गुरु के . दशा मान में कर ३६० का भाग देना तो गुरु की
अंतर्दशा का समय प्रत्येक ग्रह का निकल आयगा ।
उदाहरण ३६०)१६६१-२६-४५(४ दिन
गरु दशा ४०-४५-३९ १४४०
% गुरु मंतर ४०-४५-३८ २२१ २६० “गुरु की अंतर्दशा
२५ २१ १३२६० --२६ दिन घडी पल
२९ ` १५ ' ३६०)१३२८६(३६ घडी ४-३६-५४
२६ ० - , १०००
२९ १५ २४८६
- ३३ '४७ २१६०
३० ० ३२६.५६०
२६ :० १९५६० +४५
३० ।.० ३६०)१९६०५(५४ पल
१६ ०० ` १८००
१६ ३१ २६ “४५ ५५ “२९ '१६०५
=१६६१-२६-४५-+ ३६० १४३०
१६५
` इसी प्रकार इस रीति से प्रत्येक ग्रह की मंतर्देशा निकाल कर तीतरी है। घ. प
(१) गुदःदशाः४०-४५-३९% गुरु अंतर ग्रह ४०-४५-३९ ¬+ ३६०=गुरु अंतर ४-३६-५४
(२) -.„ .» मंगल ,, .८-११-४७--३६०=मंगल ,, ०-५५-४१ (३) 0 „» 2छूग्त 9 २५-३४-४७--३६०अयग् ,, २-५३-४७ | (४) . „ ४ सुर्यं ,, २३-३०-३५ ३६०=सूये ,, २-३९-४२ _(४) ७ „ «८ शुक्र `, ३१-२१-११+ ३६०=शुक्र , ३-३३ ०
(६) ४, » श्नि. „ ५२-४७-४९ --३६०यशनि » ९-२२-२९ (७) र, „» : ?८चन्द्र „ ४६३-२२-४०--३६०-चन्द्र „९-२६-२७ (€) „» ७ ० ~बुध ` „ ६४२५-२२ ३६०यबुध ,, ७-१७-३९