सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 127, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें» पृत्यांशी दशा साधन : ११९
इस प्रकार आया हुआ उत्तर पुवं प्राप्त उत्तर सेःमिछ जाता. है ।
तीसरी रीति पत्यांश की अंतर्देशा निकालने की
[ ग्रह पत्यांश योग काल ( द्रश्ञा समय ) » अन्तग्रेंह पत्यांश ) = पत्या योग
॥ >अंतर्देशा दिन आदि
इस रीति,से गणित.करने में कुछ अधिक अड्चन, होती है इस कारण इस रीति
को सरल: बनाने को पहिली रीति निकाली है। क्योंकि महादशा-या दशामान या
भोग, काल में . पत्यांश योग का भाग देकर पहिले ही ..वहाँ ध.व+निकाल -छिया है
जिससे बार २ भाग देना नहीं पड़ेगा । केवल ध्रव निकाल कर ध्रुव का गुणा अन्तग्रेह
के.पत्यांश में करते,जाने से; अन्तदेद्या का समय निकल आता है । जैसा पहिली रीति
देखने से. प्रगट होगा । उदाहरण--गुद में मंगळ का अन्तर निकालते हँ ।
[| गुरूपत्यांश भोग-काल अन्त्रे मंगल पत्यांश |... पत्यांश योग
४ [ ४०दि.-४५ घः-३९ प. ५ ०९२७-५१ |" ८५०९-२३-१४
= १८-५५-१२ २०-२३-१४ ==६६११२-७३३९४
-दिं. घ. प.
==०-५५-४१ मंगल की अन्तर्दशा
. गुरु की अन्तर्दशा निकाल चुके हैं अब शेष प्रहों की अन्त दंशा निकालते हैं:--
दि. घ. पमंगल दशा ८-११-४७-पत्यांश योग २००-२३'-१४'”
=२९५०७ पल ' =७३२९४''
(२) मंगळ का. ध्रुव साधन
मंगल दश्ञा.मानः २९५०७ परू = पत्यांदा- योग ७ ३३९४”=
=दिनःघटी. पल वि.=मंगल का ध्रव
o=२४-७-१ ९
दि. घ. पवि. दि. घः प.
(१): मंगल घव ०-२४-७-१९ %°मंगरू पत्यांश ०९-२७'-५१/=मंगल अंतर ०-११-१२
री... जक TR 0 NE
(३) , 99. 226सूयै », MH ०२२- ७
(४) नश 7) > शुक्र २: १-४६"३२-शुक्र १: ०-४२-५०
(५) 1 71 १८शनि „ ४-४१-२०=शनि „ १-५३८ ६
(६) ठ nt > चन्द्र ५ ४-४३-१९जचन्द्र . ॥ १-५३-५४
(७) गा 1) >खुघ | ` रर - :३-३८7५४्ब्घ 9 ३ १६१८" ०
(८) 17) 1s > गुरू. ॥,, २-१६-३०=गुर 11 ०-५५-४१ -योग-८-११-४७