भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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» पृत्यांशी दशा साधन : ११९

इस प्रकार आया हुआ उत्तर पुवं प्राप्त उत्तर सेःमिछ जाता. है ।

तीसरी रीति पत्यांश की अंतर्देशा निकालने की

[ ग्रह पत्यांश योग काल ( द्रश्ञा समय ) » अन्तग्रेंह पत्यांश ) = पत्या योग

॥ >अंतर्देशा दिन आदि

इस रीति,से गणित.करने में कुछ अधिक अड्चन, होती है इस कारण इस रीति

को सरल: बनाने को पहिली रीति निकाली है। क्योंकि महादशा-या दशामान या

भोग, काल में . पत्यांश योग का भाग देकर पहिले ही ..वहाँ ध.व+निकाल -छिया है

जिससे बार २ भाग देना नहीं पड़ेगा । केवल ध्रव निकाल कर ध्रुव का गुणा अन्तग्रेह

के.पत्यांश में करते,जाने से; अन्तदेद्या का समय निकल आता है । जैसा पहिली रीति

देखने से. प्रगट होगा । उदाहरण--गुद में मंगळ का अन्तर निकालते हँ ।

[| गुरूपत्यांश भोग-काल अन्त्रे मंगल पत्यांश |... पत्यांश योग

४ [ ४०दि.-४५ घः-३९ प. ५ ०९२७-५१ |" ८५०९-२३-१४

= १८-५५-१२ २०-२३-१४ ==६६११२-७३३९४

-दिं. घ. प.

==०-५५-४१ मंगल की अन्तर्दशा

. गुरु की अन्तर्दशा निकाल चुके हैं अब शेष प्रहों की अन्त दंशा निकालते हैं:--

दि. घ. प￾मंगल दशा ८-११-४७-पत्यांश योग २००-२३'-१४'”

=२९५०७ पल ' =७३२९४''

(२) मंगळ का. ध्रुव साधन

मंगल दश्ञा.मानः २९५०७ परू = पत्यांदा- योग ७ ३३९४”=

=दिनःघटी. पल वि.=मंगल का ध्रव

o=२४-७-१ ९

दि. घ. पवि. दि. घः प.

(१): मंगल घव ०-२४-७-१९ %°मंगरू पत्यांश ०९-२७'-५१/=मंगल अंतर ०-११-१२

री... जक TR 0 NE

(३) , 99. 226सूयै », MH ०२२- ७

(४) नश 7) > शुक्र २: १-४६"३२-शुक्र १: ०-४२-५०

(५) 1 71 १८शनि „ ४-४१-२०=शनि „ १-५३८ ६

(६) ठ nt > चन्द्र ५ ४-४३-१९जचन्द्र . ॥ १-५३-५४

(७) गा 1) >खुघ | ` रर - :३-३८7५४्ब्‌घ 9 ३ १६१८" ०

(८) 17) 1s > गुरू. ॥,, २-१६-३०=गुर 11 ०-५५-४१ -योग-८-११-४७