भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

पृष्ठ 128, कुल 280 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 128

१२० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुथं वर्षफल खण्ड

(३) लग्न की अन्तर्देशा साधन

लग्न का धुव निकालना घ. प.

लग्न दशा २५-३४-४७ < पत्यांश योग २०९-२३”-१४”-प्र्‌ व दिनादि

दि. घ. प. वि.

» ११ ९२०८७ पलन ,, ७३३९४=ध्रुव १-१५-१६-५३

दि. घ. प. वि दि घ. प (4) लग्न घव १-१५-१६-५३ % लग्न पत्यांश १०-२६'-५५=कग्न अंतर१-४९-३

(२) 1) श्र > सुय 221 १-१९-५३=सुय २२ १-४०-१४ (३) ० २ _ शुक्र ,„ २-४६-३२नशुक्र , २-१३-४० (४) » „» »शनि , ४-४१-२०-शनि ,, ५-५२-५९ (४) र » श्चन्द्र ,, ४-४३-१९-चन्द्र ,, ५-५५-२८ (६) » » शबुध „ ३-३८-५४न्बुघ ,, ४-३४-३९ (७) 2 रु गुर. ,, २-१८-३०-्युरु ,, २-५३-४६

(६) ऱ्य 7 *मंगल ,, ०-२७-५१-मंगल ,, ०-३४-५७

_ योग-२५-२४-४७

(४) सूर्यं की अन्तदंशा

दि. घ. प. सूये धुव-सूर्यं दशा २३-३०-३५ = पत्यांश योग २००-२३/-१४” दि. घ. प.वि..

= „ ५४६३५पल+ `, ७३३९४'=१-९-११-२२ दि. घ. प. वि दि. घ प.

(१) सूर्यः -ध्रुव १-९-११-२२ > सूर्य पत्यांश १-१९-५३” =सूयं अन्तर १-३२-७

(२) १2 (1) > शुक्र शय १-४६-३०=शुक्र ,, २- २-५२ (३) „ „. शनि ,, ४-४१-३०-शनि , ५-२४-२५ 0000 007...) > चन्द्र , ४-४३-१९-चन्प्र ,, ५-२६-४२ (0) 5 बुध » ३-३८-५४-बुध , ४-१२-२६ WC) जगुर „» ` २-१५-३०गुरु ,, २-३९-४३

(७) ११ २२ > मंगल ,, ०-२७-५१-मंगल' ,, ०-३२- ७

५० i %रुग्न ,, १-२६-५५-७रन ,, १-४५-१४

| योग-२३-३०-३४५ (२) शुक्र अन्तर्दशा

दि०घ० प० . 6. 727४:

शुक्र श्रुव-शुक्रदशा २१-२१-११-- पत्यांश योग २०-२३-१४

दि०्घ० प्‌० वि० ie ११२८७१ पल ,, ७३३९४=१-३२-१६-२१