भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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पत्यांशी दशा साधन : १२%

मात प्रवेश की पत्यांशी दशा साधन

वर्ष प्रवेश के सदृश मास प्रवेश में भी पत्यांश दशा निकाली जाती है ।

रीति-( मास के दिन ३०१८ पत्यांश ) + पत्यांश योग

जैसे वर्ष में ३६० दिन में पत्यांश योग का” भाग देकर ध्रुव निकालते हैं उसी

प्रकार यहाँ ३० दिन में ही पत्यांश योग का भाग देकर जो दिन घड़ी पल आता है

वही धव होता है ।

जिस ग्रह की मास पत्यांश दशा निक्रालनी हो इसी धुव में उस ग्रह के पत्यांशः

का गुणा करने से उस ग्रह की मास दशा का पाक समय निकल आता है। इन सब

ग्रहों की दशा का योग ३० दिन होना चाहिए । तब समझना गणित ठीक है।

रीति-३० दिन = पत्यांश योग=ध्रुव । घव > ग्रह पत्यांश-ग्रह दशा

इस दशा को साधन करने के निमित्त मास प्रवेश काल के इष्ट कालीन ग्रह

और लग्न पहले साधन कर लेना आवश्यक है । जैसा कि वर्ष प्रवेश. काल के इष्ट

काल के ग्रह और लग्न साधन कर उस पर से वषे की पत्यांश दशा निकाली गई थी

उसी प्रकार मास प्रवेश काल के इष्ट पद से ग्रह और लग्न पर से मास की पत्यांशी

दशा निकाली जाती है। ,

उदाहरण के लिए मान लो जैसे यहाँ वषे प्रवेश में ग्रह स्पष्ट आदि लिए हैं

वही प्रथम मास प्रवेश में ग्रह स्पष्ट छर्ने आदि हैं जिस पर से मास की पत्यांशी

दशा साधन करते हैं ।

३० दिन=१०८००० पल-:-पत्यांश २०”-१३'-१४/-७३३९४”

दिन घ० प० विर १०८०००--७३३९४=ध्र्‌ब १-२८-१७-२६

मास पत्यांश दशा

दिन घ० प० वि० OSA दि० घ० प०

(१) धुव १-१८-१७-२६ गुरु पत्यांश २-१८-३०=गु दशा ३-२३-४९.

(२) ,, ,, %मंगल पत्यांश ०-२७-५१=मंगल दशा ०-४०-५९

(३) „ „ > लर्न पत्यां्च १-२६-५५-७रग्न दशा २- ७-५४

` (४) » ,, सूर्य पत्यांश १-१९-५३स्सूर्य दशा १-५७-३३

(५) „ „ %शुक्र पत्यांश १-४६-२र-शुक्र दशा २-३३-४६

(६) 1s 11 X दानि पत्याश ४-४१-२०=शनि दशा ६-५३-५९

(७) ,, „ > चंद्र पत्यांश ४-४३-१९ऱ्चंद्र दशा ६-५६-५४

(८) » ,, > वुध पत्यांश ३-२८-४४-बुध दशा ५०२२- ६

योग=३०- ०- ०

ह इसका समय सम्वत आदि सूर्य राशि अंश आदि में जोड कर पुर्व बताई हुई

.रीति से निकाल लेना चाहिए । र ७