भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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अध्याय १५

सहम विचार

सृहमज्पारशीय पद सद्य वाची है। समर सिंह के मत से ४८ सहम है .। यवन

मत से ५० हैं. परन्तु कहीं. अधिक भी कहे गये है ।

सहम साधन : -

(१) सहम साधन के लिए ग्रह-स्पष्ट और भाव स्पष्ट लेना। ग्रह और लग्न के

अतिरिक्त. सहम साधन के लिए. कभी-कभी” और भी भाव की आवश्यकता पड़

जाती है।

(२) सहम-जन्म समय के. या वर्ष प्रवेश के समय का या कोई प्रश्‍न काळ का

बनाया जाता है । न

(३) जन्म दिन का है या रात्रि का या वर्ष प्रवेश दिन में हुआ या रात्रि में इस

चात का ध्यान रख कर सहम साधन करना पड़ता है । क्योंकि रात्रि या दिन के

विचार से क्रिया में परिवर्तन हो जाता है 1

(४) सहम निकालने के लिए किसी ग्रह या लग्न आदि से किसी दुसरे ग्रह या

भाव को घटाना पड़ता है * फिर: लगन “आदि जोड़ना पड़ता है। प्रत्येक सहम बनाने

की पृथक-पृथक क्रिया होती है जो आगे दी है ।

(५) उपरोक्त क्रिया के अतिरिक्त शोध्यक्ष संस्कार भी प्रत्येक सहम साधन करते

समय करना पड़ता है ।

(अ) शुद्धघा श्रय--शोधक-जिसमें से कोई संख्या घटाई जाती है ।

(ब) शोध्यर्क्ष-शोध्य-जिस संख्या. को. घटाते हैं ।

(क) यदि शोध्य ग्रह की राशि में. शोधक ग्रह तक ळग्न न हो तो एक राशि

और जोड़नी पड़ती है। यदि बीच में लग्न हो तो १ नहीं जोड़ना पड़ता । इसीको

शुद्धाय संस्कार कहते हैं । ३

(ख) कहीं-कहीं शोध्य और शुद्धाश्वय ( शोधक') के बीच लग्न का विचार नहीं

होता, किसी मोर ग्रह का विचार होता है। ऐसे अवसर परं वहाँ स्पष्ट बता दिया

८ डे कि शुद्धाश्वय संस्कार में .छग्न का विचार न कर किसका विचार करना चाहिये। . ` (६) शुदाभय-संस्कार - (म) शोध्ये से शृद्धाश्रय तक लग्न न हो तो १ राशि जोड़ना अन्यथा नहीं । क हु (ब) यां शुद्धांश्रय से शोध्य तक करने हो तो १ राशि जोड़ना अन्यथा नहीं थाँतु जो शोध्य और शोधक तक के बीच लग्न हो तो १ नहीं जोड़ना पड़ता । या

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