सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 140, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें१३२: सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुथं वर्षफल खण्ड
क्रम सहम समय शोधक शोष्य जोड़ना
५० बंध मोक्ष दिन रात शनि पृण्य सहम + मंगल
५१ दुःख सहम दिन रात पुण्य सहम बृहस्पति + मंगल
५२ उष्ट्र सहम दिन शनि मंगर न-लग्त
रात मंगल शनि -- लग्न
५३ पितृव्य सहम दिन सूर्य शनि न- लगत
रात शनि सूर्य --लग्न
४४ आखेट सहम दिन ६ भाव षष्ठेश --१२ भाव
(शिकार) रात षष्ठेश ६ भाव --१२ भाव
४५ विधि सहम दिन रात लग्न चतुर्थेश +लळग्न
५६ ऋण सहम दिन रात शनि शुक्र + लग्न
शुद्धाभय संस्कार या संक्य करने का स्पष्टीकरण
यहाँ जो सहम साधन की क्रिया बताई है उसमें किसी विशेष ग्रह या सहम
आदि से अन्य ग्रह आदि घटा कर लग्न या कोई ग्रह जोड़ना बताया है। इसके
अतिरिक्त प्रत्येक में शुद्धाश्रय संस्कार करना पड़ता है ।
यदि शोधक की राशि अंश आदि के आगे शोध्य संख्या की राशि अंश आदि
तक के बीच में लग्न पड़ता हो तो १ राशि और जोड़नी पड़ती है । यदि उनके वीच
लग्न न हो तो १ राशि नहीं जोड़नी पड़ती । जैसा कि शुद्धाअय संस्कार करने के
सम्बन्ध में पहिले समझा चुके हैं ।
परन्तु प्रत्येक सहम में लग्न का विचार नहीं होता । लग्न का केवल उन्हीं सहम
में विचार होता है जिनमें अन्त में लग्न जोड़ना वताया है। परन्तु उन सहमों में
जिनमें सहम क्रिया के अन्त में लग्न जोड़ना नहीं वताया है, लग्न के बदले अन्य
कोई ग्रह जोड़ना वताया है तो देखना पड़ेगा वह ग्रह जो जोड़ा जाने वाला है
शोधक और शोध्य के बीच में है तो १ राशि और जोड़नी पड़ेगी ।
जैसे ४ मित्र सहम यहाँ शोधक और शोध्य के वीच शुक्र हो तो १ राशि जोड़ना
(१ -) शास्त्र सहम (१७) जाड्य सहम (२०) दारिद्र सहम इनमें शोधक और शोध्य
के बीच बुध हो तो १ राशि जोड़नी पड़ेगी । यदि न हो तो नहीं जोड़नी पड़ेगी ।
(३६) मृत्यु सहम में शोधक और शोष्य के बीच यदि शनि हो तो १ राशि जोड़ना
न हो तो नहीं जोड़ना। (५१) दुःख सहम में शोधक और शोध्य के बीच
मंगल हो तो १ जोड़ना अन्यथा नहीं । इसी प्रकार (२५) गौरव सहम में सूर्य राशि
या चन्द्र राशि (२७) अरव सहम में लाभ भाव, (४१) सन्तान सहम में रिपु भाव,
(५३) आबेट सहम में द्वादश भाव यदि शोधक और शोध्य के बीच में ये भाव हों
तो इनमें १ राशि और जोड़ना अन्यथा नहीं ।