सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 141, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंसहम विचार : १३३
लग्नेश घटाने पर विचार
(२३) सामर्थ्यं सहम में मंगल ही लग्नेश हो तो दिन या रात वृहस्पति से शुद्ध
करना अर्थात् मंगल के स्थान में वृहस्पति लेना । (२४) काम सहम में लग्नेश चन्द्र
हो तो दिन या रात्रि में चन्द्र के स्थान में सूर्य लेना ।
यहाँ एक सहम के कई नाम हैं और जिन २ सहम की एकसी क्रिया है वे
इकटूठे दिये हैं जैसे (२) गुरु सहम को विद्या सहम और ज्ञान सहम भी कहते हैं
(३) देह सहम, वल सहम और यश सहम की एक-सी क्रिया है इत्यादि ऊपर के चक्र
के अनुसार समझ लेना ।
सहम निकालने का उदाहरण आगे दिया है। इसके लिए ग्रह स्पष्ट और भाव
स्पष्ट की आवश्यकता है ।
वर्ष प्रवेश समय चैत्र शुक्ल ६ सोमवार सम्बत् २००२ इष्ट २९--४४-१३९।। है
जिस समय की पत्यांशी दशा निकाल चुके हैं वर्ष प्रवेश दिन में है। दिन मान
२९-५४ है । इस समय का भाव स्पष्ट और ग्रह नीचे दिये हैं ।
भाव १ संधि २ सं० ३ सं० ४ सं० ५ सं० ६ सं०
राशि ५ प द. ६ ७ ७ का चार SN
अंश ४ १९ ४ १९ ४ १९ ४ १९ ४ १९ ४ १९
कला १३ १४ १५ १६ १७ १८ १९ १८ १७ १६ १५ १४
विक० १६ १६ १७ १८ १९ २० २१ २०१९ १८ १७ १६
प्रति० ० ५० ४० ३० २० १० ० १० २० ३० ४० Yo
भाव ७ सं० ८ सं० ९ सं० १० सं० ११ सं० १२ सं०
रादि ११ ११ ० ० १ १२ २ ३ ३ ४ 02
अंश ४ १९ ४ १९ ४ १९ ४ १९ ४ १९ ४ १९
क० १३ १४ १५ १६ १७ १८ १९ १८ १० १६ १५ १४
वि० १६ १६ १७ १८ १९ २० २१ २० १९ १८.१७ १६
प्रति० ० ४० ४० ३० २० १० ० १० २० ३० ४० Wo
ग्रह स्पष्ट सूर्यं ११ रा-५०-३३'-९” चन्द्र १-रा-१६९-४४-२०”
मंगल १ २ ४६ २१ बुध ११ २० २३ १४
गुरु ५ २ १८ ३० शुक्र ० ७ १९ ४१
शनि २ १२ १ १ राहु २ २१ ३६ १५
केतु ८ २१ ३६ १५
सहम साधन का उदाहरण
शु=शुदधाश्रय क्रिया=शोधक और शोष्य के वीच लग्न हो तो १ रा० जोड़ना या
शोध्य और शोधक के बीच लग्न न हो तो १ राशि जोड़ना ।
शोधक=्शुद्धा्य=जिसमें से घटाना है ।
शोध्य=शोध्यरक्षऽजिसे घटाना है।