सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 148, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें"१४० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड
सहम सहम नाम सहम स्पष्ट सहम सहम सहम का
क्रम राशि अंश कला विकला राशि स्वामी भाव
३९ वाणिज्य सहम षु ० ३४ २२ धनु गुरु चतुर्थ
“१३ बंदक सहम द ० ३४ २२ » (0 गर
६ आशा सहम द द ५४ ३६ १: १7 २
१ पुण्य सहम पावरी करड २७ १. 0? (0
३२ भ्रातु सहम द २४ ३० ४५ ,, 1 पंचम
“२६ काये सिद्ध सहम ९ ८ ४६ २२ मकर शनि १
७ पितृ (राज) सहम ९ १० ४१ दा) श्र ग
“२० दारिद्र सहम ९ १९ २४ २७ ,, 0) गर
३३ पुत्र सहम 0 ९0७ 90 छु > | षष्ठ आरंभ संधि
“३४ रोग सहम A १२. १ 7 पष्ठ ३७ धन (धर्थ) सहम ११ १ ८ ५२ मीन गुरु सात "१९ बंधन सहम AMR NR श्र
१६ प्रसूत सहम ११ १६ दु ३२ „ गर १7 “४१ संताप सहम ११ २९ ३१ ५५ „» ४ अष्टम आरंभ संधि
सहम की राशि का स्वामी सहमेश कहलाता है ।
सहम पर उस के स्वामी की दृष्टि है या नहीं इसका विचार करना पड़ता है ।
“इस कारण इन ग्रहों का दृष्टि साधन कर लेना चाहिए। जिस सहम के सम्बन्ध में
विचारना है उस पर ही उसके स्वामी की दृष्टि का विचार करना चाहिए
“क्योंकि प्रत्येक सहम पर प्रत्येक की दृष्टि का विचार करने में बहुत समय लगेगा ।
ताजोक्त दृष्टि गणित द्वारा साधन करना पहिले बता चुके हैं मान लो (४) विवाह
सहम २ रा--२९९--३१--५६” का विचार करना है । इसका स्वामी बुध है । बुध की दृष्टि का विचार करना है। “दृश्य विवाह सहम २--रा २९०-३१५६” दोष ३ रा०=१५न+भंश -द्रष्टा सहमेश बुध ११-- २० -- ८ -_४२ १५- ०-०
शेष=३- ९-- ८-४२ +९५४२
=२४--८--४२=द्ष्टि २४-5८
चलित भाव कुण्डली में लाभ भाव में विवाह सहम है और वुध अष्टम में आ “जाता है । सहमेश बुध की विवाह सहम पर गुप्तवैरा दृष्टि है।
ऽसहमों का अर्थ
किसी २ सहमों के अथं में भ्रम हो जाता है जैसे गुरु, बल, महात्म, आशा, राज
“आदि । इस कारण उन्हें नीचे समझाया है--(१) गुरु-उपदेश करने वाला, विज्ञान,