सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 149, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंसहम विचार : १४१
विद्या मात्र विषयक बुद्धि विद्या जानना। (२) बलप्सेना। देहुन्हाथ पेर आदि
पिंडदेह । (५) महात्म=मन्त्र गांभीय का नाम है। डति = बुद्धिमानी का नाम
है। (६) आशा=इच्छा का नाम है। दिशा का भी नाम है। (७) राजाऱ्यगुरुता,.
मंडलेशत्व, सामान्य राजा गौरव, श्रेष्ठ ज्ञानी, निग्रह कारागार, बन्धन सामथं, द्रव्य
दान समर्थं तथा छत्र चामर आदि राज चिह्न धारी को राजा कहते हँ । (८) जल=
क्रांति हीरक आदि मणि कांतिवत्, जल पथ मागें इत्यादि । (१२) शास्त्र-श्रुति स्मृति
ज्ञान । (१४) पर कर्म-दासत्व का पर्याय है । (१५) पानीय पतननका तात्पर्ये वृष्टिः
आदि ऊपर से गिरने वाला पानी । जल में डूबने का भी अर्थ है । (१६) प्रसव=
गर्भाधान सन्तान उत्पत्ति। (१७) जाडचसअज्ञान, ग्रन्थविस्मरण आदि। (२३) सामर्थ८
शारीर आदि बल । (३४) मांच-आधि, मानसी व्यथा,व्याधि, रोग, ताप, सन्ताप ।
(३५) बांधव=्सपिड सात पुरुष पर्यन्त । (४२) श्रद्धान्धम कार्यं की मति । यहाँ
विश्वासता का मुख्य अर्थ लेना । (१३) वंधक=पराश्रय ।
दोष सहम पुण्य, विवाह आदि का अर्थं स्पष्ट है ।
सहम का फळ निकालना
(१) = (सहम--सहमेदा) = (दोष के अंश बना > सहम राशि का उदय) -- ३००:
इसमें राशि का स्थानीय स्वोदय लेना ।
उदाहरंण
रा ० 7 का ० 4 डा
विवाह सहम २--२९--३१--५६ दोष ९९--५-०४२ ६०)१२८५२(२१४
--पम्रहमेश बुध११--२०--२३--१४ > सहम राशि ३०६ _१२०
दोष ३-- ९-- ८-०४२ मिथुन स्वोदय ८५
= ९९०८-४२” २७५४ २४४८ ६१२ ६०
सहम राशि मिथुन का स्वोदय ३०६ २७५४ १२२४ २५२
३००)३०३३८-२२-१२(१०१ दिन ३०१९४ २४४८ १२८५२ २४०
“३०० +४४ ०२१४ =१२ १२
३३ ३०३३८ २६६२ ६०)२६६२(४४
३०० =२२ २४०
३८% ६० =३०३३८-२२-१२-= ३०० २६२
२२८०+ २२ =दिन-घ-प २४०
३००)२३०२(७ घ. १०१-७४० २२
२१०० =मास--दिन--घ-प
२०१२ ६० +१२ AOS
३००)१२१३२(४० प. वर्ष प्रवेश के दिन से इतने समय के बाद विवाह
१२०० सहम का फल होगा । वर्ष प्रवेश की तारीख में उतना
टि १३२ समय जोड़ देने से फल समय प्राप्त होगा ।