भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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*१४२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

जिस सहम का फल समय विचारना हो इसी प्रकार विचार लेना । परन्तु समय

“निकालने के प्रथम सहम के स्वामी की दृष्टि, पाप या शुभ ग्रहों की दृष्टि और बल

'एवं भाव आदि सम्बन्ध से पहिले अच्छी प्रकार विचार लेना कि उस सहम का फल “होगा या नहीं या कितना फल होगा । यदि पूर्ण रूप से फल होने का भाव दृष्टि “आदि से प्रगट हो तब फल का समय निकालना अन्यथा नहीं। सहम निर्वल हो फल

“देने की सामर्थ न हो तो उनको चक्र में स्थापन भी नहीं करना अर्थात्‌ छोड़ देना । (२) मतांतर-पूर्व प्राप्त दिन <- ३०=छब्धि राशि ।

इसे वर्ष प्रवेश कालिक सूर्य राशि में कला पर्यंत जोड़ना तब फल के समय का -सूयं स्पष्ट निकलेगा । यह सूर्य स्पष्ट जिस समय आवे तब उस सहम का पाक समय जानना ।

जैसे पूर्व प्राप्त दिन १०१ दिन ७ घ० ४० प० ३०)१०१(३ राशि

२३ रा० ११° ७' ४७” ९०

“वर्ष प्रवेश का सूर्यं ११ रा० ५० ३३” ९” ११ अंश +प्राप्त समय ३ ११ ७ ४० जब वर्ष प्रवेश के पस्चात्‌ स्सूयें स्पष्ट-२ १६ ४० ४९ २--१६--४०--४९ पर

सूर्यं आयगा तब सहम का

फल मिलेगा । (३) अन्य फल

2 कोई कहते हैं कि हीनांश पत्यांश क्रम से जब सहमेश की दशा होगी तव फल

प्होगा ।

अधिकांश मत है कि उपरोक्त प्रथम बताई रीति से जो दिन मिळे उसके भीतर

सहमेश की' दशा में उस सहम का फल होगा ।

जब जन्म कुण्डली से विवाह संतान आदि का योग प्रकट हो तब समय "निकालना । जब योग न हो तो उसका सहम या सहम का फल समय निकालने की

आवश्यकता नहीं है ।

सहम का फल विचारने के रिए कि सहम पर सहमेश की दृष्टि है या नहीं किन शुभ या पाप ग्रहों की दृष्टि सहम लग्न या सहम पर है। कौन-कौन शुभ या पाप ग्रह सहम लग्न पर हैं । सहम लग्नेश का बल क्या है निर्बेल या पूर्ण बली आदि है । वर्षं कुण्डली में सहम और सहमेश ६-८-१२ घर में नहीं हैं । सहमेश और लग्नेश ६-८-१२ के स्वामियों के साथ तो नहीं हैं । ये शुभ ग्रहों से युक्त दुष्ट होने से शुभ और पाप ग्रहों से युक्त दृष्ट होने से अशुभ हो जाते हैं । इसी प्रकार ६-५-१२ भाव या इनके भावेश से सम्बन्ध होने से बुरा फल होता है । इन सब पर विचार कर फल निर्णय करना । परन्तु कुछ ऐसे सहम हैं जिनका फल उल्टा है जैसे मृत्यु रोग सहम आदि बुरे सहम हैं जो बलवान हों तो रोग बढ़े निर्बेल हों तो रोग घटा देंगे ।

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