भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

पृष्ठ 151, कुल 280 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 151

अध्याय १६

सास प्रवेश साधन का उदाहरण

दिनांक १९--३--१९४५ सम्वत २००२ चैत्र शुक्ल ६ सोमवार वर्ष प्रवेश का सूर्य ११रा.-५०--३३'--९/ और इष्ट २९--४४--२२॥ पर वर्ष प्रवेश है। यही पहिला मास प्रवेश का सूर्य हुआ । इसके आगे प्रतिमास १-१ राशि जोडते जाने से अगले मास के मास प्रवेश का सूय हो जाता है जैसा यहाँ बताया है ।

अब इस मास के समीप का सूर्य पंचांग मास प्रवेश का सूर्य

(१) पहिला मास-११र-५९-३३/-९” द्वारा खोज कर उसकी गति पर से गणित

हारा निकालेंगे कि यहाँ बताया हुआ

मास प्रवेश का सूर्य किस २ समय पर

(११)

मास रा.

¥

शर

[71 :२०-५-३२३-९

» =१-५-३३-९

9 =२-५-३३-९

=» =३-५-३३-९

प्र =४-५-३३-९

29 =५-५-३३-९

» =६-५-३३-९

॥॥ =७-५-३३-५

» =८-५-३३-९

» =९-५-३३-०

,» =१०-५-३३-०

अं. क. वि. क. वि. दिन

५ ३५ ४७ ५८ ३२ गुरुवार

५ ३३ ३ ५७ ३६ इतवार ५ % ५७ ५७ ३ बुधवार

५ २७ ० ५७ ५ इतवार

आयगा ।

रीति-

(१) इष्ट सूर्यं और पंक्तिस्थ सूरय में जो जिस से घटे घटाकर अंतर निका-

लना । यदि पंक्ति से इष्ट सूयं घट गया

तो ऋण चालन होगा । यदि इष्ट सूर्य में

से पंक्ति घट गया तो धन चालन होगा ।

क्योकि पंक्ति से इष्ट पहिले हो तो घटा

कर (ऋण) और पंक्ति के आगे सूर्यं है तो

(घन) जोड़कर इष्ट काल निकाला जायगा ।

(२) अमुक गति एक दिन में है तो इतना (उक्त) मंतर होने को कितना समय

लगेगा ? अंतर में गति का भाग देने से उत्तर दिन घड़ी पल विपल में आयगा । वह

चालन ऊ॑ (धन या ऋण) उपरोक्त होगा ।

(३) पंक्ति का बार और घड़ी पल में वह चालन ॐ के अनुसार जोड़ने या

घटाने से इष्ट समय निकल आयगा ।

मास प्रवेश के सूयं-के समीप. का सूर्य पंचांग से खोज कर नीचे दिया है-

पंक्ति इष्ट० गति पंचांग में दिया हुआ समय सम्वत २००२

समय मास तिथि

द्वितीय चेत्र शुक्ल ८

बैशाख शुदी ९

ज्येष्ठ शुक्ल १०

आषाढ, शुक्ल १२

तारीख

१९४-१९४५ २०-५४१५

२०-६-४५्‌

२२-७४५