भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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मास प्रवेश साधन का उदाहरण : १४७

(११) एकादश मास प्रवेश इष्ट सूर्यं ९-५-३३- ९ अंतर २०-५५ _१२५५” दिन घ. प. वि. पंक्ति ९५-१२-१४ गति ६१-१३ ३६७२ ०-२०-३० ३ अंतर ०-०-२०-५५+ चारून +

नाति ६१-१३ पंक्ति शनिवार=्वार घ. प. वि.

चालन + ७» ०" ०००

०-२०-३०-३

=:७-२०-३०-३

मास प्रवेश वार ७-शनिवार को इष्ट २०-३०-३ पर होगा ।

(१२) द्वादश मास प्रवेश

'पंक्तिस्थ सूयं १०रा.-५९-४२/-१२” अंतर ९-३” _५४३” दिन घ, प. वि.

इष्ट , १० -५-३३- ९ गति ६०-३६ ३६३६ ०- ८-५७-३७

अंतर = ० -०- ९- ३ ऋण चालन ऋण

गति ६०-३६ पंक्ति सोमवार=वार. घ. प. वि.

चालन ऋण २- ८-०-० |

-०- ८-५७-३७

शेष=१-५१-२-२३

द्वादश मास प्रवेश वार १=इतवार को इष्ट घ. प. वि.

५१-२-२३ पर होगा ।:

लाग्रतमिक कोष्टक L०हarithmic 7४७6 से भी मास प्रवेश का चालन

सरलता से निकल आता है । ज्योतिष शिक्षा भाग २ गणित खण्ड के अध्याय ७ के

'पृष्ठ १३४ क,ख,ग,घ,च,छ,ज,झ में ८ चक्र सारिणी अंक के दिये हैं उनके सहारे भी

सरलता से पंक्ति और इष्ट के अंतर में गति का भाग देने के विना इस सारिणी से

'उत्तर चालन प्राप्त हो जाता है ।

परन्तु सूर्यं की गति यदि ६०” से अधिक हुई तो यह सारिणी काम नहीं देगी ।

“क्योंकि यह सारिणी ६० के अंक के आधार पर वनी है । इस कारण ६० से अधिक

“गति में पहिले बताये हुए गणित द्वारा निकाल लेना अर्थात्‌ अंतर की विकला में गति

की विकला बनाकर गति का भाग देने से यह इष्ट समय चालत का प्राप्त हो

जाता है । उदाहरण

(१) द्वितीय मास प्रवेश का सारिणी अंक

(पंक्ति-इष्ट) अंतर १'-३८=१-५६५०७६४ इस शेष के समीप का कुछ

सूर्यगति=५८-३२=०-०१९७४८० बड़ा सारिणी अंक

=१-५५४३२८४ १.५५६३०२५ मिला ।

इसके ऊपर १ और नीचे वाजू से ४०=चालन १ घ० ४० प० हुआ ।