सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 157, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंमास प्रवेश साधन का उदाहरण : १४९
जितनी' बार गति घट जाय उतने दिन और इतने घड़ी पल उत्तर चालन प्राप्त
हुआ । उदाहरण--
मान लो पंक्ति और इष्ट का अंतर भाज्य ५७८४ है और सूर्य की गति भाजक
छोटा ५६-३० है ।
यहाँ ५७-४ में भाजक ५६-३० घटायो=१ वार घटा=१ दिन ५
मंतर ५७-४ शेष ०-३४=२०१४८२२६ इसके समीप का कुछ बड़ा
गति ५६-३० गति५६-३०=००२६१०२८ अंक=२.०००००००
शेष ०-३४ शेष=१.९९८७२०८ घ. प.
घ. प, ०-३६
यहाँ १ बार घटाया था तो १ दिन ओर ०-३६ चालत प्राप्त हुआ ।
यहाँ गति और छोटी होती तो अंतर से घटाने पर जो दोष बचता है यदि वहू
गति से बड़ी बचती तो पहिले घटाये हुए शेप में फिर उसी गति को घटाना बारंबार
घटाते जाना जब तक कि दोष अंक गति से छोटा अंक न प्राप्त हो जाय । यहाँ
जितनी वार गति घटाई गई उतने दिन और शेष के सारिणी अंक से गति के सारिणी
अंक घटाने पर उससे जो घटी पल प्राप्त हो वह लेना ।
अब इसी उपरोक्त उदाहरण को गणित द्वारा करते हैं--
५७.४ ___३४२४ __दिन घ. प. ३३९०)३४४४(१दिन ५६-३० ३३९० १ ०-३७ ३३९०
३४ > ६०
२०४०(०घड़ी'
१०१७०
२०७००
२०३४० `
३६०
डिप्पणो--पंक्ति के बार के आगे घड़ी पल ०-०दिया है क्योंकि पंक्तिस्थ सूरये
का इष्ट ० है। यदि मिश्र कालीन पंक्ति सूर्ये हो तो वार के आगे मिश्र काळ की
घड़ी पल भी देनी चाहिए ।
प्रत्येक मास प्रवेश का इष्ट निकाल चुके हैं। अब उस इष्ट पर से लग्न सारिणी
के. सहारे लग्न निकाल कर नीचे दिया है । F
ब