सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 160, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें१५२ :-सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड
(४) चतुर्थ मास प्रवेश की कुण्डली । ज्येष्ठ शु० १० बुधवार २८-३६-३१ वृश्चिक लग्न
84 ५/ षड्धिकारी
१ जन्म लग्नेश=बुध २वर्ष , =बुंध
३ मास ,, =मंगलं ४ मुंयेश ,, शनि
५ त्रिराशीश दिन लग्न वृश्चिक लग्न-मंगल
६ समय पति दिन सूर्य राशीश=्वुध
« लग्न पर किसी. की दष्टि नहीं हैं
जम्म लग्न ३ पर शनि की गुप्त स्नेहा
दृष्टि है । इससे मांसेश शनि हुआ ।
(५) पंचम मास प्रवेश कुंडली । आषाढ़ शु० १२ इतवार इष्ट ६-२७-५१ सिंह लग्न
वळ षडधिकारी
३श,रा| २ वर्षे ,, च्बुध ३ मास ,, स्पूरय.
४ (टा » शनि शर दिन सिह .छग्न-चंद्र ६ समय पति दिन सूर्य राशीश=चंद्र
लग्न पर सूर्य बुध की दृष्टि नहीं है ।
शनि की ३ गुप्त स्नेहा दृष्टि और चंद्र
की ५ प्रत्यक्ष स्नेहा दृष्टि ४५ की है । जों
शनि से बलवान दृष्टि है । इससे मासेश
शनि हुआ । चंद्र मासेश नहीं होगा ।
(६) षष्ठ मास प्रवेश कुण्डली । श्रावण शुक्ल १४ बुधवार इष्ट ३०-३५-२० मकर लग्न ।
षड़धिकारी ` १ जन्म छग्नेश-बुध २ वर्ष ,, च्बुध ३ मास ,, =शनि
४ मुंथेश ,, ¦ =शनि ५ तिराशीश दिन मकर लग्न-मंगल ६ समय पति दिन सूयं राशीश=सूये
लग्न पर शनि और मूर्यं की दृष्टि नहीं है । बुध की प्रत्यक्ष बैरा दृष्टि है
और मंगळ की प्रत्यक्ष स्नेहा दृष्टि है।
बुध मासेश हुआ क्योंकि उसकी ६०” दृष्टि है ।