भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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१५२ :-सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

(४) चतुर्थ मास प्रवेश की कुण्डली । ज्येष्ठ शु० १० बुधवार २८-३६-३१ वृश्चिक लग्न

84 ५/ षड्धिकारी

१ जन्म लग्नेश=बुध २वर्ष , =बुंध

३ मास ,, =मंगलं ४ मुंयेश ,, शनि

५ त्रिराशीश दिन लग्न वृश्‍चिक लग्न-मंगल

६ समय पति दिन सूर्य राशीश=्वुध

« लग्न पर किसी. की दष्टि नहीं हैं

जम्म लग्न ३ पर शनि की गुप्त स्नेहा

दृष्टि है । इससे मांसेश शनि हुआ ।

(५) पंचम मास प्रवेश कुंडली । आषाढ़ शु० १२ इतवार इष्ट ६-२७-५१ सिंह लग्न

वळ षडधिकारी

३श,रा| २ वर्षे ,, च्बुध ३ मास ,, स्पूरय.

४ (टा » शनि शर दिन सिह .छग्न-चंद्र ६ समय पति दिन सूर्य राशीश=चंद्र

लग्न पर सूर्य बुध की दृष्टि नहीं है ।

शनि की ३ गुप्त स्नेहा दृष्टि और चंद्र

की ५ प्रत्यक्ष स्नेहा दृष्टि ४५ की है । जों

शनि से बलवान दृष्टि है । इससे मासेश

शनि हुआ । चंद्र मासेश नहीं होगा ।

(६) षष्ठ मास प्रवेश कुण्डली । श्रावण शुक्ल १४ बुधवार इष्ट ३०-३५-२० मकर लग्न ।

षड़धिकारी ` १ जन्म छग्नेश-बुध २ वर्ष ,, च्बुध ३ मास ,, =शनि

४ मुंथेश ,, ¦ =शनि ५ तिराशीश दिन मकर लग्न-मंगल ६ समय पति दिन सूयं राशीश=सूये

लग्न पर शनि और मूर्यं की दृष्टि नहीं है । बुध की प्रत्यक्ष बैरा दृष्टि है

और मंगळ की प्रत्यक्ष स्नेहा दृष्टि है।

बुध मासेश हुआ क्योंकि उसकी ६०” दृष्टि है ।