भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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१५४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

(१०) दशम मा० प्र० कुण्डली । पौष कृ० ३ शुक्रवार इष्ट ०-४१-८ धन लग्नः

१ जन्म लग्नेश च्बूध

२ वर्षे ,, च्बुध

३ मार्स २ ऱ्गुरु

४ मुंयेदा ,, =शनि

५ त्रिराशीश दिन धन लग्नम्शनि

६ समय पति दिनऱ्गुर ८”

लग्न पर बुध व शनि की दृष्टि नहीं

है । केवल गुरु की गुप्त स्नेहा दृष्टि है ।'

मासेश गुरु हुआ ।

(१ १) एकादक्ष मा० प्र० कुण्डली । माघ कु० २ शनिवार इष्ट २०-३०-३ मिथुन लग्नः

१ जन्म लग्नेश =वुध

र्‌ कँ >प्बुध

३मास ,, न्न्व्‌ध

४ भुंथेश ,, =्शनि

५ त्रिराशीश दिन मिथुन लग्न=शनि

६ समय पति दिनन्श्नि

लंग्न पर शनि की दृष्टि नहीं है ॥

केवल बुध की प्रत्यक्ष बैरा दृष्टि है।

मासेश बुध हुआ ।

(१२) द्वादश्च मा० प्र० कुण्डली । फाल्गुन कृ० १ इतवार इष्ट ५१-२२३ धन लग्नः

१ जन्म छरनेश =वुध

२ वर्ष „ स्बुध

३ मास ,, ऱ्बुध

४ मुंथेश 7३ स्शनि

५ तिराशीश रात्रि घन रग्न-दशनि

६ समय पति रात्रिस्सूर्य

शनि की प्रत्यक्ष बैरा दृष्टि है सूर्य

बुध और गुरु की गुप्त स्नेहा दृष्टि हे ।

शनि मासेश हुआ, क्योंकि उसकी ६० दृष्टि है ।