सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 184, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें१७६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड
चतुर्थश-चतुर्थेश शुभ ग्रह युक्त वी हो और लग्नेश लाभेश से युक्त हो तो
वाहन छाभ और शरीर सुख हो ।
पाप ग्रह-वर्ष या जन्म में चौथे में पाप ग्रह हो तो पुत्रों को अरि हो । इसी
प्रकार पंचम घर चतुर्थेश युक्त हो तो वर्ण मंद फल हो ।
चतुर्थेश--चतुर्थेश केन्द्र में हो जन्म लग्नेश चौथे हो तो राजा से धन और सुख
प्राप्त हो ।
उपरोक्त ग्रह चंद्र युक्त हो तो पुत्र का भी सुख हो ।
च॒तुर्थेश--चतुर्थेश वलवान होकर चतुर्थ में बुध गुरु युक्त या दुष्ट हो तौ सुख
हो धन प्राप्त हो सव अरिष्ट दूर हो ।
चतुर्थेश-चतुर्थेश जन्म में पूर्ण वली हों या केन्द्र त्रिकोण में शुभ ग्रह हो तो
माता को सुख हो धन यश मिले शत्रु नाश हो।
चतुर्थे -चतुर्थेश यदि ६-८-१२ भाव में पाप युक्त हो अथवा अस्त होकर पाप
अह से दृष्ट हो तो उस वर्ष में माता को अनेक रोग व माता का क्षय हो ।
चंद्र--लग्न से चतुर्थ स्वक्षेत्री चंद्रमा या शुक्र हो उस वर्ष में नवीन घर वनता है!
चतुर्थश--चतुर्थेश अस्त होकर शात्रु क्षेत्री हो तो उस वर्ष घर में आग लगे ।
पत्चम भाव में ग्रह फल
शुभ ग्रह-- पुत्र सुख, धन लाभ, आनन्द । ;
पाप ग्रह-- पुत्र नाश,धन धान्य नाश, बुद्धि नाश, चोर का उपद्रव, रोग, विरोध ।
पंचम सूर्य-पुत्रो के शरीर में पीड़ा, सुबुद्धि की हानि, शोक, मोह, शरीर में
रोग, धन हानि, राजा से भय, परिजनों से विवाद, स्त्री को कप्ट, सुख हीन ।
पंचम चंद्र--अपनी वुद्धि से जय की प्राप्ति, मित्र से लाभ, संतान सुख, गौरव
स्त्री सुख, विजय, मान, धन लाभ ।
पाप दृष्ट हो तो--पुत्रों के शरीर में रोग ।
शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो-पुत्रो को सुख हो ।
पंचम मंगल--पुत्रो को पीड़ा, शत्रु से विवाद, गुप्त चिता, उदर में पीड़ा, बुद्धि
नाश, अग्निभय और शोक, पुत्र उत्पत्ति, धन लाभ, नौकरों से सुख, सुवर्ण वस्त्र अन्न
का लाभ, रत्री पुत्र और भाइयों का सुख, राजा से मनोरथ की वृद्धि, भाग्योदय यश ।
पंचम गुरु-पुत्र की वृद्धि, बुद्धि वळ से जय, शत्रु नाश, शरीर सुख, मनोवाछित
भोग, भूमि सुवर्ण वस्त्र की प्राप्ति, मंत्र विद्या आदि जनित सुख, श्रेष्ठ बुद्धि ।
पंचम शुक्र--पुत्रों की वृद्धि, भय क्लेश चिता आपत्तियों का और छात्रु का नाश,
धन युक्त, अनेक प्रकार के मंत्र और शास्त्र में अभ्यास, श्रेष्ठ बुद्धि स्त्री पुत्र आदिं
का सुख ।
पंचम शनि--पुत्र कष्ट, पेट में पीड़ा, धन क्षय, राजभय, कष्ट विकलता, खोटी
बुद्धि, स्त्री पुत्र मित्र जनों में पीड़ा ।