सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 186, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें१७८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षकछ खण्ड
पंचमेश--पाप ग्रहों से आक्रान्त या अस्त हो तो पुत्रों को महाक्लेश हो ।
शनि-- जिस राशि में जन्म का शनि हो वही राशि वर्ष में पंचम हो तथा
विषम राशिस्थ मंगल पंचम में हो तो उस वर्ष पुत्रों की चिता हो । यदि समराशि
का मंगल पंचम हो तो पुत्र को पीड़ा हो ।
मं.श. चं-मंगळ शनि या चन्द्र निर्बल हो ५ या ११ घर में हो तो पुत्र कष्ट हो ।
पंचम गुरु--वर्ष कुण्डली में पंचम या नवम घर में गुरु हो और जन्मराशि से
पंचम नवम या प्रथम गुरु हो तो उस वषे में स्त्री के गर्भ रहे पुत्र का जन्म हो ।
शनि राहु--पंचम भाव शनि राहु से युक्त या दृष्ट हो तो कमर दुखे ।
सप्तमेदा पंचम --सप्तमेश वर्ष में पंचम या लग्न में हो और जन्म राशि से ७,
९, ८, ६, ११, ५ घर में गुरु हो तो उस वर्ष निएचय विवाह हो ।
पाप ग्रह--पंचम में पाप ग्रह हो पंचमेश सूर्य के स्थान में हो तो संतान कष्ट
हो धन धान्य का नाश हो।
लग्नेश दशमेदा- लग्नेशा दशमेशा युक्त पंचम में हो तो राजाओं से प्रीत यदा
धनधान्य लाभ हो।
द्वितीयेदा-द्वितीयेश पंचम में हो दशमेश दशम में हो तो शत्रु नाश हो धन धान्य
लाभ हो अरिष्ट दूर हो ।
गुरु-जन्म में गुरु जिस राशि में हो वह राशि पंचम हो या वहाँ वर्षेश या बुध
या मंगल हो तो पुत्र की प्राप्ति हो ।
मुंथा चन्द्र पंचमेश-पंचम में मुंथा युक्त चन्द्र हो पंचमेश युक्त हो या पंचमेश
बलवान हो तो अवश्य पुत्र हो ।
शुक्र मंगल-पंचम में शुक्र हो और मंगल से युक्त या दुष्ट हो तो उस वर्ष पुत्र
की प्राप्ति हो ।
क्रूर ग्रह मंगल चन्द्र-क्र्र ग्रह युक्त मंगल या चन्द्र ५, ७ या १२ भाव में हो तो
कलत्र का वियोग हो ।
लग्नेश दशमेश-लग्नेश और दशमेश एक हो और पंचम में हो तो धन धान्य
लाभ हो, यश बढ़े राजाओं से मित्रता हो ।
संतान योग-जिस वर्षे पंचमेश अपने भाव को देखता हों और कोई शुभ ग्रह या
मित्र ग्रह की उस पर दृष्टि हो तो उस वर्ष संतान लाभ का योग होता है पंचमेदा
पुरुष ग्रह हो तो पुत्र, स्त्री ग्रह से कन्या होने का योग होता है।
जिस राहि पर दानि, राहु और सूर्य हो उन राशियों के अंक जोड़कर ३ का
भाग दो। शेष १ से पुत्र २ से कन्या । शेष ० हो तो भी पुत्र होगा ।
षष्ठ भाव फल विचार
षष्ठ में पाप ग्रह-धन लाभ, सुख लाभ ।
मंगल-अति हर्ष शत्रु नारा ।
क्षीण चन्द्र-कफ ज्वर, खांसी ।