भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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वर्षफल में भाव फल विचार : १७९

शुभ ग्रह-भय कलह, धन नाश ।

षष्ठ सुयं-शत्रु नाश, मातृ पक्ष में पीड़ा, सुख लाभ, व्यापार से लाभ, राजा

और मित्र पक्ष से लाभ, स्त्री पुत्र का सुख ।

षष्ठ चन्द्र-शत्रु से विरोध या विवाद, नेत्र में पीडा, गुप्त चिता, निरर्थक व्यय,

स्त्री को पीड़ा राजा या चोर से भय, भाइयों से वैर, पीड़ा इलेष्म, वात व्याधि ।

षष्ठ मंगल--राजा से प्राप्ति, मित्र से लाभ, स्त्री सुख, शत्रु नाश, धन लाभ,

घोड़ों आदि का सुख आनन्द ।

षष्ठ बुध-शत्रु से विवाद, स्त्री कष्ट, वृथा खर्च, शरीर में कष्ट कफ पीड़ा आदिं

से दुःख, स्वजनों से विवाद, शत्रु पक्ष की वृद्धि ।

पष्ठ गुरुस्त्री के शारीर में पीड़ा, नेत्र रोग, ज्वर, अतिसार, शत्रु वृद्धि, घन

नाश, कुटुम्व विरोध, चिता, धन हानि ।

षष्ठ शुक्र-दात्रु से भय कष्ट, गुप्त चिता, शरीर में रोग, मस्तक और नेत्र में

पीड़ा, धन नाश, परिजनों से विवाद, घर में कष्ट ।

षष्ठ शनि-भूमि और धन लाभ, कीति की वृद्धि, दुःख का नाश, धान्य और

अस्त्र का लाभ, राजा की कृपा हो, सत्संग, रोग नाश, पराक्रम बढ़े,स्त्री पुत्र से सुख।

पष्ठ राहु-शत्रु नाश, राजा सम कीति, गौ भूमि सुवर्णं वस्त्र का लाभ, धन

प्राप्ति, दुःख नाश आरोग्य, स्त्री पुत्र से सुख ।

षष्ठ केतु-शत्रु नाश, गौ भूमि सुवर्ण वस्त्र का लाभ, धन प्राप्ति, दुःख नाश,

राजा के तुल्य हो ।

षष्ठ मंगल-जन्म से मंगल पष्ठेश होकर वर्ष में ६ भाव में हो तो रोग होता है।

अदि वैसे ही मंगल को पाप ग्रह से इत्यशाल होता हो तो महान रोग हो शुभ ग्रह

"की दृष्टि व योग से कुछ हल्का रोग होता है।

मंगल जन्म में जिस राशि में हो, वह राशि यदि वर्ष लग्न हो और क्षृत दृष्टि

(१-४--१०) से देखा जाय तो रक्त पित्त रोग होता है अग्नि भय हो या और कोई

"रोग हो । शुभ दृष्टि हो तो रोग की अल्पता होती है ।

मंगल वक्रगति होकर छठे स्थान. में पाप पीडित हो और वर्षेश भी हो तो रुधिर

विकार या पित्त रोग होवे ।

शनि-वक़ी और पापाक्रांत शनि वर्षश होकर छठे हो तो रोग, त्रिदोष जनित

रोग भथ, शूल, गुल्म रोग, नेत्र रोग, विषम जवर भय हो ।

म में जिस राशि में शनि हो, वह राशि वर्ष लग्न हो तो रूक्षता रोग, शीत

पित्त रोग हो ।

यदि जन्म कालिक शनि की राशि शनि से दृष्ट हो तो कुछ कम फल हो यदि

'पाप युक्त हो तो मृत्यु हो ।

पष्ठ सूर्य-सूर्य पाप पीडित वर्षेश होकर छठे घर में हो तो नेत्र शूल आदि नेत्र

रोग हो ।