सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 191, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंवर्ष फल में भाव फल विचार : १८३
सप्तम शुक्र-शुक्र वर्षश होकर मङ्गल से दृष्ट हो या मङ्गल वषश होकर शुक्र
से दृष्ट हो तो स्त्री लाभ हो ।
स्त्री सहम पर मङ्गल शुक्र की दृष्टि हो तो स्त्री लाभ हो या विवाद हो.।
सहमेश-स्त्री सहम पर शुक्र तथा सहमेश की दृष्टि से भी उपरोक्त फल हो।
स्त्री सहमेश और सप्तमेश अस्तंगत हो पाप युक्त दृष्ट हो तो स्त्री को कष्ट हो 1
जन्म कालिक सप्तमेश वर्ष में स्त्री सहमेश हो तो स्त्री सुख हो ।
चन्द्र-यदि जन्म के शुक्र की राशि में वर्ष में क्षीण चन्द्रमा हो तो स्त्री प्रसंग
सुख अल्प हो ।
मङ्गल-यदि जन्म के शुक्र की राशि में वली मङ्गल हो तो स्त्री सुख और
उत्सव को करता है ।
गुरु-जन्म के शुक्र की राशि में वर्ष में गुरु केन्द्र त्रिकोण में हो तो स्त्री सुख हो ।
हद्देश-जन्म के शुक्र की राशि में वर्ष में वर्ष लग्न के हुद्दा का स्वामी केन्द्र
त्रिकोण में हो तो स्त्री सुख हो ।
विवाह सहमेश-जन्म के शुक्र की राशि में वर्ष का विवाह सहमेश केन्द्र त्रिकोण
में हो तो स्त्री प्राप्ति हो ।
सप्तमेश-जन्म का सप्तमेश यदि वर्षे शुक्र से युत या दृष्ट हो तो बहुत विलास
सुख युक्त स्त्री सुख हो ।
जन्म में सप्तमेश शुक्र हो वह वषं में सप्तम हो और वली होकर लग्नेश से
इत्यशाल हो तो निश्चय स्त्री लाभ हो । *
सूर्य-सुर्य पंचाधिकारियों में हो तो स्त्री के हेतु चित्त में व्याकुलता रहे ।
शनि-शनि सप्तम हो तो कलंक कलह और भत्संना हो ।
मुन्था-मुंयेश की राशि का गुरु हो वा मुंया की राशि में गुरु हो वा मुंया राखि
को गुरु देखे तो विवाह योग होता है ।
सूर्यं मंगल युक्त मुन्था सप्तम में हो तथा स्त्री सहम पापाक्रांत हो तो स्त्री व
पुत्र से कष्ट होवे। उस पर पाप ग्रह की दृष्टि भी हो तो स्त्री पुत्रों से अधिक ही
कृष्ट होगा ।
स्वगृही या उच्च का चन्द्र मुन्था से सप्तम हो अर्थात् मुन्था मकर में हो चन्द्र
ककं में हो या मुन्था वृश्चिक में हो चंद्र वृष में हो तो विदेश यात्रा होती है। पाप
दृष्टि हो तो कष्ट हो । शुभ दृष्टि से सुख पूर्वक यात्रा हो चंद्र ककं में हो तो जल
यात्रा वृष में हो तो स्थल यात्रा हो ।
सप्तम गुरु-वर्षश गुरु पंचाधिकारी होकर सप्तम में हो तो क्रय-विक्रय से घन
लाभ हो!
मुंया-मुन्था ७ या ८ स्थान में हो उसपर शनि की दृष्टि हो तो शुरू रोग हो ।
मंगल चंद्र राहु-सप्तम में मंगल और चन्द्र युक्त राहु हो तो क्लेश हो स्त्री
का धन नाद हो ।