भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

पृष्ठ 190, कुल 280 में से

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१८२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुथं वर्षफल खण्ड

सप्तम सूयं-स्त्री के शारीर में पीड़ा, अपने शरीर में पीड़ा, दिर में रोग, मार्ग

में भय,विवाह, गुदा तथा पैर में पीड़ा, पेडू ब नेत्र में पीड़ा, विचित्र वाहन प्राप्त हो।

सप्तम चन्द्र-पाप ग्रह से दुष्ट हो तो खांसी ज्वर वात पीड़ा भय, स्त्री को पीड़ा

कफ उत्पत्ति से बाधा । शुभ युक्त या दुष्ट हो तो धन लाभ, स्त्री सुख, राजा सेः

प्रतिष्ठा, ग्रामान्तर से लाभ, वाणिज्य या जल मार्ग से लाभ ।

सप्तम मंगल-मार्ग में कष्ट, स्त्री को कष्ट,चित्त में क्लेश, शत्रु से भय, विवाद,

देश का छूटना, आत्म पीड़ा, पुत्र या स्त्री को रोग ।

सप्तम बुध-स्त्री के साथ सुख विलास, प्रतिष्ठा की वृद्धि सुवर्ण वस्त्र जय प्राप्तः

हो वाणिज्य से धन प्राप्ति धर्म कार्य में मन, मार्ग से लाभ ।

सप्तम गुरु-स्त्री सुख, निर्भयता, शत्रु नाश, वाहन का सुख, राजा से धन प्राप्ति,

वाणिज्य से व्यवहार से और मार्ग से धन की प्राप्ति, सम्मान प्राप्त हो ।

सप्तम शुक्र-स्त्री का सुख, भोग विलास का सुख, शरीर सुख, शत्रु नाश, वस्त्र

ब सुवर्ण लाभ, वाणिज्य से धन प्राप्ति, मान वाहन व धन प्राप्ति ।

सप्तम शनि-स्त्री को कष्ट, मागं में भय, पशु का मरण, राज्य से भय, विकलता,

क्लेश, मिथ्या कलंक, स्थान हानि, धन नाश, रोग, भाई व मित्र को कष्ट ।

सप्तम राहु-गुप्त इन्द्रियों में पीड़ा, प्रमेह आदि रोग, विष व अग्नि से पीड़ा,

प्रवास, भय, स्त्रियों को कष्ट, चित्त चंचल, स्थानान्तर, अंग में पीड़ा ।

सप्तम केतु-विष अग्नि से पीड़ा, गुप्त इन्द्रियों में पीड़ा, स्त्री को पीड़ा या स्त्री

से भय प्रमेह वात आदि रोग ।

करनेश-जन्म लग्नेश वली होकर वर्ष में सप्तम हो तो स्त्री सुख हो।

लग्नेश सप्तमेश का इत्थश्षाल हो तो भी स्त्री सुख हो |

जन्म लग्नेश वर्ष लग्नेश सप्तम हो और उदित तथा बळवान्‌ हो तो स्त्री सुख हो ।

सप्तम शुक्र-वली वर्षेश शुक्र सप्तम हो तो स्त्री पक्ष से सुख हो और इस पर गुरु की दृष्टि भी हो तो अत्यन्त स्त्री सुख करता है।

ot शुक्र पंचाधिकारियों में होकर मङ्गल से दृष्ट हो सुख अत्यन्त तो स्त्री करता है ।

शुक्र सप्तम में निबंछ व अस्त हो तो स्त्री से कष्ट हो ।

वषश शुक्र सप्तम हों अधिकारी बुध से दृष्ट हो तो अल्प वय की स्त्री से या

वेश्या से व्यभिचार हो ।

उक्त शुक्र पर अधिकारी या अनधिकारी शनि की दृष्टि हो तो वृद्धा परस्त्री से.

व्यभिचार हो ।

उक्त शुक्र पर अधिकारी या अनधिकारी गुरु की दृष्टि हो तो विवाहिता नवीन

भार्या से संयोग हो तथा शीघ्र सन्तान प्राप्त हो ।

जन्म में शुक्र जिस राशि में हो बह वषं में सप्तम हो और शुक्र वर्षश हो तो

स्त्री छाभ हो ।

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