सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंवर्षफल में भाव फल' विचार : १८१
ऐसे ही बुध केतु युक्त सूर्यं यदि मंगल या शनि के साथ इत्थशाल करता हो तो
चूरे वषे भर रोग हो ।
या जन्म काल में अधिकार प्राप्त वुध वर्ष में केतु युक्त हो तो पूरे वर्ष भर
रोग हो ।
मुंथा-यदि मुंथा चतुर्थ या सप्तम स्थान में हो शनि से युक्त या शनि की शत्रु
दृष्टि से दृष्ट हो तो शूल पीड़ा होती है ।
यदि ४ या ७ स्थान में स्थित मुंथा पाप ग्रह से युक्त या दृष्ट हो तो शूल
रोग हो ।
रोग का स्थान आदि-रोग कारक ग्रह जिस राशि में जिस नवांश में हो उस
राशि या नवांश में जो वली हो उस राशि के स्वरूप गुण धर्म से जो स्थान आदि
गट हो उस से रोग का विकार स्थान आदि जानना ।
सूर्य आदि-वूर्यं या वक्री गुरु मंगल शनि छठे हो तो वात पित्त विकार से नेत्र
रोग हो।
शुक्र-छठे हो तो इलेष्म विकार से अधिक पीड़ा हो ।
तृतीयेश-तृतीयेश छठे हो पाप ग्रह युक्त दुष्ट हो तो कलह व मित्र आत्मीय जनों से क्लेश हो भाई को कष्ट हो ।
सर्य चन्द्र-सूर्य और चन्द्र पाप ग्रह युक्त ६ या ८ भाव में हों तो गज दोष से
मृत्यु हो ।
जय उच्च शनि-शनि उच्च का ३ या ६ घर में सौम्य ग्रह से युक्त हो तो लाभ हो
सुख प्रताप बढ़े राजा से अर्थ लाभ हो ।
सूर्य-छठे सूर्य, तीसरे राहु हो तो शत्रु और. रोग नाश हो कुल की कीति बढ़े ।
मंगल चन्द्र-मंगल युक्त चन्द्र छठे हो और दशम में शुभ ग्रह युक्त गुरु हो तो
सुख हो । राजा से अइव आदि की प्राप्ति हो।
अष्टमेश्-अप्टमेश छठे घर में हो चन्द्र क्रूर ग्रह युक्त या दुष्ट हो उस पर गुरु
की दृष्टि न हो तो मृत्यु हो ।
चन्द्र-चन्द्र छठे घर में मकर का हो सिह राशि में राहु हो तो शिव भी रक्षा करें तों उस वर्ष में अरिष्ट हो मृत्यु हो ।
चन्द्र-चन्द्र ६ या ८ घर में हो ओर वर्षेश पाप और शुभ ग्रह युक्त ६-८ या १
धर में हो तो कफ विकार हो मृत्यु हो ।
अष्टमेश-अष्टमेश छटें हों लाभेदा लाभ में हो तो धन मित्र लाभ पुत्रसुख हों
अरिष्ट दूर हो ।
सप्तमभाव का ग्रह फल
` सप्तम में-पाप ग्रह युत चन्द्र-रोग भय ।
“पाप ग्रह=स्त्री नाशा (कष्ट) कलह नौकर से भय ।
` शुभ ग्रह-धन लाभ सुख यश परिवार सुख राज सम्मान ।