सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंवर्ष फल में भाव फल विचार :.१८४५
अष्टम भाव का गृह फल
अष्टम में-पाप ग्रह युक्त चन्द्र-मरण ।
पापग्रह-मरण सम कष्ट !
शुभ ग्रह-जिस ग्रह का जो धातु हो, उससे रोग, धन नाश, सम्मान नादा । यदि
शुभ ग्रह से इत्यशाल हो तो शुभ फल होगा ।
अष्टम सूर्य-वन्धुओं से दुःख, शरीर कष्ट, धन का क्षय, यश नष्ट, स्त्री कष्ट,
'पुत्र को रोग, व्रण, वात पीड़ा,राजा,अग्नि,विष व सपं से भय, नेत्र रोग,अनादर।
अष्टम चन्द्र-कष्ट, ज्वर, वमन, उदर रोग, कफ विकार, नेत्र रोग, अंग-भंग,
'जल से भय, विवाद, धन नाश, थोड़ा आनन्द मिले, वृद्धि मन्द, अनर्थ हो 1
, अष्टम मंगल-झात्रु से पीड़ा, शरीर में कष्ट, स्त्री को कष्ट, शस्त्र घात, धन नाश,
मानसिक चिता, विकलता, मित्र से विपत्ति, रक्त पित्त प्रकोप, दीनता ।
अष्टम बुध-मृत्यु तुल्य कष्ट, कफ और ज्वर का प्रकोप नेत्र में पीड़ा, भय,
'बबराहुट। अन्य मतवाले अष्टम बुध का फल अच्छा होना मानते हैं । -
अष्टम गुरु-ज्वर, वमन, कफ, पीड़ा, आँख-कान में रोग, शत्रु का भय, स्त्री .
'कष्ट, ब्रण से पीड़ा, परदेश गमन, वियोग, धन खर्च; वुद्धि भ्रष्ट हो ।
अष्टम शुक्र-मृत्यु तुल्य कष्ट, ज्वर आदि की पीड़ा, भय, नेत्र रोग, शत्रु से
"विवाद, स्त्री पुत्र को पीड़ा, चिता, प्रवास, धर्म नाश ।
अष्टम शनि-मृत्यु, ज्वर पीड़ा, कफ रोग, अपवाद, राज भय, धन हानि, शत्रु से
-भय,- संताप, वादी की पीड़ा, व्यसन, स्त्री पुत्र को क्लेश ।
अष्टम राहु-मृत्यु तुल्य कष्ट, राजभय. ज्वर, अतिसार, कफ वृद्धि विसूचिका,
चात रोग, प्रवास स्त्री को कष्ट, वन्धुओं से विवाद, प्राप्त धन का क्षय।
अष्टम केतु-मृत्यु तुल्य कष्ट, राजा से भय, ज्वर, अतिसार कफ, विशूचिका, बात रोग का भय।
अष्टम सूर्य-जन्म में यदि सूये शुक्र से मुशरिफ करे और वर्ष में-पंचाधिकारियों
में होकर केन्द्र में हो तो राज भय या राज रोग से भय ।
अष्टम सू. मं. श.-सूयं मंगल शनि यदि ८ या १० घर में होतो सव,री से गिरने का भय ।
अष्टम चन्द्र-यदि चन्द्रमा पुण्य सहम में लग्न में हो सप्तम में पाप ग्रह हो तो
मृत्यु, यदि दो पाप ग्रह २-१२ घर में हों तो भी मृत्यु हो। और जन्म लग्नेश वर्ष
“लग्नेश अष्टम में हो तो मरण ।
जन्म और वर्ष में अधिकार पाया हुआ चन्द्रे यदि जन्म की बुध आश्रित राशि में
हो, पाप पीड़ित हो तो परदेश गमन हो, लोगों से विवाद और वैमनस्य होता है ।
जम्म में जहाँ मङ्गल हो उस राशि में वर्ष में चन्द्र अधिकारी होकर रहे तो रोग झो, गुप्त राज भय हो । >