भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

पृष्ठ 194, कुल 280 में से

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१८६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थं वर्षफल खण्ड

अष्टम म ङ्गल-मङ्गल वर्ष में अष्टम हो तो अग्नि शस्त्र या राजा से भय हो ।

मङ्गल यदि दशम हो तो चतुष्पद से पतन और रक्त विकार से रोग ।

वर्ष लग्नेश यदि मङ्गल से पीड़ित हो तो शत्रु या अपने वंशजों से कलह तथा

लड़ाई का भय हो ।

मङ्गल यदि १,५,९,२ राशि में होकर वर्ष में अष्टम हो तो मृत्यु देता है । जन्म में मङ्गल जिस राशि में हो वही यदि वर्ष लग्न हो जाय बुध यदि वर्षेवा'

हो तो वह वर्ष अच्छा नहीं होता ।

मङ्गल युक्त चन्द्र ६-८-१२ घर में हो तो मृत्यु ।

मङ्गल-मङ्गर युक्त वषश अष्टम हो तो मृत्यु हो।

दिन के वषं प्रवेश में वर्षेश मङ्गल सूर्य युक्त हो तो राज भय-हो ।

मङ्गल वर्षा होकर निर्वळ और पाप युक्त दृष्ट हो तो लोहे की चोट से घाव हो ।.

यदि वही मंगल अग्नि तत्त्व की राशि में हो तो आग से जलने का भय हो ।

यदि द्विपद राशि में (३-६-७-९ पूर्वार्ध राशि में) हो तो क्रूर नर से मरण ।

निवंल मङ्गल वर्षेश होकर दशम हो तो राजा से, मन्त्री से, शत्र, से, मित्र से,

गुरु से भय हो ।

बुध- जन्म के मङ्गल की राशि में बुध वर्ष में अधिकारी हो तो रोग हो । , वेसा बुध मङ्गल की क्रूर दृष्टि से दृष्ट हो तो रक्त विकार आदि रोग हो। वसा वुध अस्तंगत हो पाप पीड़ित हो तो विदेश से बन्धन मरण। पाप ग्रह से पीडित बुध यदि क्रूर दृष्टि से मङ्गल से इत्थशाल करता हो तो मरण ॥

बुध मङ्गल की दशा में हो पाप दुष्ट हो तो धन नादा उपरोक्त दोनों योगों में यदि शुभ ग्रहं की दृष्टि हो तो शुभ होता है। गुरु-वर्ष लग्न से २-८ घर में गुरु वषश हो पाप दुष्ट हो तो धन नादा हो । जन्म में ग्रह अष्टम हो यदि वर्ष में पंचाधिकारियों में न हो तो भारी झगड़ा हो । जन्म में गुरु अष्टम हों यदि वर्ष में अधिकार रहित हो उस पर शुक्र की' दृष्टि हो तो विवाद में प्रत्युत्तर देने से जय हो । जन्म और वर्ष में अधिकारी गुरु जन्म के मङ्गल की राशि में हो पाप पीड़ित हो तो लोगों से विवाद होता है । ः

गुरु पाप युक्त अष्टम में हो और चन्द्र युक्त मङ्गल लर्न में हो तो मूर्छा और तंद्रा रोग हो ।

अष्टम शनि-हानि अष्टम हो अष्टमेद से इत्यशाल करता हो तो मृत्यु हो। शुभ ग्रह से इत्यशाल होने से अशुभ योग अनिष्टकर नहीं होता । जन्म से अष्टमेश शनि वर्ष में भी अष्टमेश होकर लग्नेश से क्रूर दृष्टि से इत्यशाल: करता हो तो तत्काळ मृत्युदायक होता है । ` जन्म और वर्षे का अधिकार पाया हुआ पाप पीड़ित चन्द्र यदि शनि के पढ (राशि) में हो तो स्पष्ट रूप से विवाद होता है । £

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