सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 195, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंवर्षे फल में भाव फल विचार : १८७-
लग्नेश-लरनेश मुंथेश वर्षेश यदि अष्टमेश हो या अष्टमेश से इत्थशाळ करता:
हो तो मरण प्रद हो जन्म कालिक दुर्ग्रह मारक ग्रहों की दशा या अन्तदं्षा में उक्तः
फल होगा ।
वर्ष लग्नेश निर्वल या अस्तंगत या पाप युक्त हो तो स्त्रियों से विवाद हो ।
जन्म छू्नेश पाप से पीड़ित होकर अष्टम हो तो रोग व कलह हो ।
पाप युक्त जन्म लग्नेश यदि वर्ष में अष्टम हो तो मृत्यु हो।
जन्म लग्नेश वर्ष लग्नेश अष्टम हो तो मरण हो ।
मुन्या-शनि के साथ मुन्या कहीं हो उस पर मंगल की शत्रु दृष्टि हो तोः
आत्मघात ( अपने हाथ से मृत्यु ) हो ।
सहमेश-मुत्यु सहमेश उदित हो (अस्त न हो ) निबंल हो तो जीवन में मृत्यु,
समान कष्ट हो।
पुण्य सहमेक्ष यदि पुण्य सहम से अष्टम हो पाप ग्रहों से युक्त दुष्ट हो तो मरण हो ।-
या जन्म लग्न से अष्टमेश पृण्य सहम में हो पाप युक्त दृष्ट हो तो मरण हो ।
जन्म लग्न से अष्टम राशि यदि वर्ष में पुण्य सहम हो पुण्य सहमेश से युक्त हो:
तो मृत्यु हो । सहमेश-या वर्ष लग्न से अष्टम राशि में पुण्य सहम और पुण्य सहमेदा भी होः
तो मृत्यु हो । पुण्य सहमेश पाप से युक्त हो और अष्टमेश ६-८-१२ घर में हो तो मृत्यु हो ।-
या मुन्था या वर्षेश पाप युक्त हो ६-८-१२ घर में हो तों मृत्यु हो ।
गुरु-अष्टम, नवम या द्वादश गुरु हो उस वपं में तीर्थ यात्रा होती है ।
लग्नेश अष्टमेश-लग्नेश और अष्टमेश एक होकर अष्टम में हो तो रुधिर विकार:
व शरीर कष्ट हो |
मंगल चंद्र-अष्टम में मंगळ और चंद्र हो लग्नेश ६-८ घर में हो तो विष याः
व्याघ्र से मृत्यु का भय हों ।
दशमेश्-अष्टम में दशमेश अस्तंगत हो छठे घर में शनि, चंद्र हो तो राजा या:
रोग से मृत्यु हो या ऊपर से गिरे। शनि चंद्र-अष्टम में शनि युक्त चंद्रमा हो लग्नेश से युक्त या दूष हो तो उस
वर्षे धन, स्त्री, कुटुम्ब में कष्ट हो अरिष्ट हो ।
मङ्गल-मङ्गल ८, १ या १० घर में हो तो चौपाये से चोट लगे । क
लग्नेश-छग्नेश अष्टम हो, गुरु, शुक्र युक्त मङ्गल सप्तम हो अष्टम में चंद्रमाः
हो तो शीतला आदि का रोग हो अरिष्ट हो।
व्ययेश-व्ययेश अष्टमं हो अष्ठमेश धनभाव में हो लग्नेश निबेळ हो तो सपं केः
काटने से मृत्यु हो ।
` मङ्गल चंद्र-अष्टम में मङ्गल युक्त चन्द्र हो तो गुप्त दुःख हो ।
सूर्य शुक्र शनि-शुक्र अष्टम में हो वा लग्नेश पांप ग्रह से दृष्ट हो तो भय पलेष्माः