भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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पृष्ठ 196

“१८८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुथं वर्षफल खण्ड

:आदि रोग हो, सूयं अष्टम में हो तो नेत्र रोग, शनि हो तो जल से भय, अष्टमेश को

“पाप ग्रह देखता हो तो मृत्यु हो ।

लग्नेश-लग्नेश अष्टम में अस्तंगत हो, दशमेश छठे और धनेश बारहवें हो तो

“दरिद्र करता है ।

लग्नेश अष्टम, शनि दशम, चन्द्र पंचम, पापयुक्त मंगल दशम में हो तो विष से

“मृत्यु हो । `

सूये-सूर्यं अष्टम हो, अष्टमेश चंद्र युक्त हो, लग्नेश छठे हो, शनि दशम हो तों

: छाठी की चोट से अरिष्ट हो ।

गुरू_गुरु अष्टम में पापयुक्त हों, शनि युक्त चंद्र बारहवें हो तो राजा से अनेक

-कष्ट दण्ड से धन हानि हो ।

दश्मेश-नीच का दशमेश अष्टम हो, पापग्रह दशम में हो तो उस वर्ष में सुख न

"हो उसका राज्य हरण हो जायगा । :

दशमेश अष्टम हो, अध्टमेश् दशम में हो अष्टम क्रूर ग्रह युक्त हो तो अर्थ नाश

:हो । राजा से भय हो !

लग्नेश-लग्नेश अष्टम में हो अष्ठमेश केन्द्र में हो शनि और चंद्रमा छठे हो तों

“अनेक कष्ट हों ।

लग्नेश चम्द्र-चन्द्र युक्त लग्नेश अष्टम हो लग्न में पाप युक्त अष्टमेश हो तो

-रोग शोक आदि से शरीर क्षय हो ।

लग्नेश शुक्र-ऊग्नेश शुक्र अष्टम में पाप ग्रह युक्त व दृष्ट हो लग्न में मंगल हों

«तो तृषा आदि से कष्ट हो ।

गुरु चन्द्र-गुर चन युक्त अष्टम में हो मंगळ सप्तम हो, यह खल्छासर योग कष्ट

“देने वाला है।

चन्द्र युक्त गुरु अष्टम हो और शनि के साथ मुन्था हो तो मृत्यु हो

केतु चन्द्र-केतु युक्त चन्द्र अष्टम होया अष्टम पर दृष्टि हो तो स्त्री का वियोग

-या मनुष्य का मरण हो ।

चन्द्र-केतु युक्त चन्द्र अष्टम हो, अष्ठमेश केन्द्र में हो लग्नेश ६ या १२वाँ हो

"तो निर्धन हो । !

पाप युक्त चन्द्र अष्टम हो नीच का लग्नेश सप्तम हो तो भय, चिता दुःख

~निरुद्यम करे |

चन्द्र सूर्य मंगछ-चन्द्रमा या सूर्य से युक्त मंगल अष्टम हो शनि ७ या ९ स्थान

"में हो तो उस वर्ष ९वें महीने में अरिष्ट हो ।

चन्द्र मंगछ-चन्द्र युक्त मंगळ अष्टम हो तो अग्नि आदि से भय इवास कास रोग

“घात पात आदि का कष्ट हो ।

__ अष्टमेश-अष्ठमेश केन्द्र या त्रिकोण में हो तो विष बन्धन आदि से कष्ट, श्वास

मूळ दाह तन्द्रां आदि रोग हो ।