भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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वर्षे फल में भाव फल विचार : १८९:

शनि चन्द्र-शनि और चन्द्र अष्टम हों तो शूल घात धातु क्षय शीतला आदि

अनेक रोग हो ।

लग्नेश शनि-लग्नेश शनि युक्त अष्टम हो चतुर्थ में वक्री पाप ग्रह हो, पाप'

ग्रह को दृष्टि हो तो अनेक प्रकार के दुष्टों से कष्ट हों ।

अष्टमेश-अष्टमेश अष्टम हो बलवान्‌ हो लग्नेश सप्तम हो तो शूल दस्त दाह:

तन्द्रा आदि रोग से कष्ट हो ।

मंगल-मंगल अष्टम हो चन्द्र छठे हो तो शत्रु का उदय घात पात आदि हो ।

चन्द्र-अष्टम चन्द्र हो या मङ्गल शनि युक्त चन्द्र के वर्ग में हो तो बात कफ सेः

शरीर क्षय शस्त्र से ज्वर पीड़ा आदि हो ।

नीच कं ग्रह-जो ग्रह जन्म में नीच का हो वही ग्रह वर्ष में अष्टम भाव में हो

तो सुख घन आदि प्राप्त हो ।

५ ग्रह-अष्टम में ५ ग्रह हों या ६ से अधिक नीच युक्त हों तो वज्ञ से हत होने

का कष्ट हो ।

वर्षेश बुध-वर्षे् और बुध अष्टम हों शनि मङ्गल पाप युक्त सप्तम में हों चन्द्रः

की दृष्टि हो तो कण्ठादि रोग या मरण हो ।

पाप ग्रह-अष्टम क्रूर ग्रह युक्त दृष्ट हो सप्तमेश ४या५ भाव में हो तो मुत्यु हो।'

लग्नेश-लग्नेश अष्टम हो शनि चन्द्र के स्थान में हो चन्द्रमा पाप युक्त मकर

राशि में हो तो कष्ट हो जलोदर रोग हो ।

लग्नेश मज़्ल-लग्नेश और मङ्गल अष्टम हो अष्टमेश ६ या १२ भाव में होः

तो भृत्यादि का घात शत्रु विवाद अरिष्ट हो ।

लाभेश-अष्टम में लाभेश हो गुरु चतुर्थं हो चतुर्थश नीच का सप्तम हो तो ४

महिना में अरिष्ट हो ।

तृतीयेश-तृतीयेश् अष्टम में क्रूर ग्रह से दुष्ट हो तो शरीर पीड़ा हो भाई काः

वियोग हो ।

व्ययेश-व्ययेश अष्टम हो धनेश व्यय में हो तो स्व जाति में अधिक व्यय होः

ईश्वर की पूजा करे ।

पाप ग्रह-अष्टम में एक भी पाप ग्रह शत्रुग्रही हो पाप ग्रह से दुष्ट हो तोः

बालक नष्ट हो ।

नवम भाव का ग्रह फल

नवम में पाप ग्रह-सहोदर को भय, पशुओं को पीड़ा ।

सुर्य-अति हृषं प्रद ।

शुभ ग्रह-धन व धर्म की वृद्धि ।

अन्य मत है कि नवम में पाप ग्रह भी शुभ हैं ।

नवम सूर्य-धमे राज्य व यश को बढ़ावे, बन्धुओं को पीड़ा कारक, स्त्री पुत्र से:

विवाद क्लेश, मति मन्द ।