सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 198, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें-१९० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वषंफल खण्ड
नवम चन्द्र-भाग्योदय, धन का लाभ, घर में सौख्य, शत्रु नाश, व्यापार में
“सुख, पुण्य का उदय, यात्रा में सुख, यश की वृद्धि, चित में संतोष,राजा से सम्मान ।
नवम मङ्गल-पुण्य का उदय, धन का लाभ, प्रतिष्ठा एवं पाप में प्रीति, उद्वेग,
अपने जनों से कलह, धन व ऐडवर्य की हानि भी करे ।
नवम बुध-धर्म में बुद्धि, राजा से जय, भाग्योदय, कीर्ति की वृद्धि, शत्रुनाश,
“कार्य सिद्धि में विघ्न, उद्वेग और स्त्री को पीड़ा भी करता है।
नवम गुरु-अधिक धर्मे, सुख प्राप्ति, भाग्योदय, धन लाभ, तीर्थाटन, पुण्य कार्ये
“में बुद्धि, स्त्री विलास, मन प्रसन्न, राज सुख ।
नवम शुक्र-धर्म की बृद्धि, राजा तुल्य हो, वाहुन सुख, गौ भूमि भूषण वस्त्र का
मलाभ, आरोग्यता, स्त्री, पुत्र मित्र से सन्तोष, निर्बल बुद्धि, उन्नति ।
नवम शनि-जाया पुत्र मित्र को कष्ट, धन नादा, पाप बुद्धि, भाइयों से भय
:और पीड़ा एवं भाग्य का उदय, राजा से लाभ, कीति, शत्रु नादा ।
नवम राहु-शरीर पीड़ा, स्त्री से विरोध, धर्मे काम में विलम्ब, पशु व वन्धुओं
“को पीड़ा एवं अन्य मत से राजा से जय, भाग्योदय, रात्रुनाश ।
नवम केतु-धर्म नाह, पशु और भाइयों को पीड़ा, दातु नारा, भाग्यो दय, राजा
मसे जय ।
नवम सूर्य-तर्षेश सूर्ये अधिकार युक्त हो और चन्द्रमा से कम्बूली भी हो तथा
- स्वगृह उच्चादि में होवे तो अपनी इच्छा से मार्ग चलना पड़े मार्ग में सुख भी होवे ।
-यदि सूर्य स्वगृह आदि अधिकार युक्त न हो तो दूसरे की प्रेरणा से गमन होवे, मागं
-में सुख भी न हो ।
नवम चन्द्र-यदि चन्द्र या गुरु जन्म के शनि की राशि में वर्ष में नवम भाव में
“पाप युक्त हो तो बिना प्रयोजन दीर्घ मार्ग चलना पड़े ।
चन्द्रमा बलवान होकर नवम में हो और, मुन्था सप्तम हो तो विदेश सम्बन्धी
“मार्ग चलना पड़े ।
नवम मङ्गल-वर्षे्च मङ्गल ३ या ९ स्थान में बलवान हो पाप युक्त न हो तो
यात्रा गुणदायक होवे चर कायं भी स्थिर हो जावे अर्थात् कोई भी कार्यं अधिक
समय तक स्थिर रहता है । जड
जन्म में गुर जिस राशि में हो उती में वर्ष का मङ्गल नवम हो नौकर और
- धर्म की प्राप्ति होने वाली यात्रा होती है । टु
जन्म का बुध जिस राशि में हो उसी में वर्ष का मङ्गल हो और धनेश की दृष्टि
- उस पर हो तो यात्रा सुख देने वाली होगी । र
जन्म का मंगल स्व राशि में हो वर्ष में भी स्वराशि का नवम स्थान में हो और
लग्न को देखता हो तो शुभ कार्ये सम्बन्धी यात्रा हो और यात्रा में प्रसन्नता हो।
यदि गुरु से नवम स्थान में बली मङ्गल हो तो यात्रा शुभ होती है।