भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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वर्षे फल में भाव फल विचार : १९१

नवम मंगल-जन्म के शनि की राहि ऐ वर्ष में मंगल ३-९ घर में वलहीन

अस्तंगत पाप युक्‍त दृष्ट हो तो पाप को वृद्धि हो ।

नवम मङ्गल-मङ्गल वषश होकर निर्व अधिकार रहित होकर नवम में हो तो

“उसे अपने सम्यन्धियों को छोड़कर दूर देश जाना पड़े।

नवम म० बु० गु०-मङ्गल और वुध बली होकर गुरु से युक्‍त हो अस्त न हों

-तो शत्रु सेना पर आक्रमण के लिए जाना पड़े और यश सुख देने वाला जय हो ।

नवम बुध-वर्षश बुध वली हो और पाप रहित होकर वक्री हो और ३-९ स्थान

में हो तो तीर्थ या देव सम्वन्धी यात्रा होवे ।

वैसा बुध वर्षे होकर पाप पीड़ित हो (क्रूर दृष्टि हो) नतो बुरी यात्रा हो ।

नवम वुध-बुध जन्म अधिकारी (छग्नेश) होकर वर्ष में उस राशि में हो जि

"में जन्म का शनि है और पाप युक्त हो तो शत्रु से कलह सम्वन्धीमार्ग चलना हो ।

नवम गुरु-बली वर्पेश गुरु पाप युक्त या दुष्ट रहित ३-९ घर में हो तो धमं

सम्बन्धी यात्रा होती है ।

यदि गुर निर्वेल होकर वर्षेश हो और पाप पीड़ित होकर ३-९ स्थान में हो तो

'कुयात्रा हो ।

अधिकार रहित गुरु नवम में हो तो दूर देश की यात्रा होती है वहाँ राजा से

"मिलन उससे लाभ प्रतिष्ठा होती है '

नवम शुक्र-वर्षेश शुक्र ३-९ घर में पाप रहित हो बलवान हो तो मागे में

सुख हो। यदि शुक्र अस्तंगत, व वक्री होकर ३-९ घर में -हो तो मार्ग गमन ठीक नहीं

होता इच्छा के विरुद्ध गमन हो ।

नवम शनि-यदि अधिकार रहित शनि नवम हो तो अशुभ यात्रा हो ।

शनि पंचाधिकारियों में होकर वषश होकर ३-९ घर में हो तो धर्म की वृद्धि

हो । पाप नाश हो।

शनि-वर्षेश शनि अस्त हो निर्बेल पाप युक्त हो तो पाप करने वाला नास्तिक हो

यदि ऐसा शनि ३ या ९ घर में हो ।

लग्नेश-लग्तेश यदि नवमेश को अपना तेज देता हो अर्थात्‌ लग्नेश शीघ्र गति

चाला अल्प अंश में हो और नवमेश मन्द गतिवाला अधिक अंश में हो और दोनों

दीप्रांश के भीतर हों तो पूर्व निश्चित यात्रा होवे ।

यदि लग्नेश वर्षेश का इत्यश्ञाल होता हो या वषं लग्नेश और मुन्थेश का

इत्यशाल हो तो भी उपरोक्त फल हो ।

सब योगों में लग्नेश और नवमेश का इत्थशाळ होता हो तो अकस्मात्‌ गमन

हो जहाँ संभावना न हो वहाँ जाता पड़े ।

वर्षेश-कोई बली ग्रह वर्षेश पंच अधिकारियों में कोई अधिकार प्राप्त होकर