सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 200, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें१९२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुथं वर्षफल खण्ड
केन्द्र में हो पाप युक्त दृष्ट नं हो अधिकार मिलने से परदेश में गमन होवे या सेनाः अध्यक्ष के पद पर होकर जाना पड़े।'
मुन्था-मुन्था यदि ३-९ घर में हो शुभ में आश्रय से पुण्य का आगम होता है और पाप के आश्रय से पाप का आगम होता है। सूर्य-सूर्य वर्षेश होकर क्षीण बळ पाप युक्त या दुष्ट होकर ३-९ घर में होतो पापकर्ता और धर्म का निन्दक हो ।
गुरु गुरु वर्षेश होकर अधिकारी हो ३-९ स्थान में हो तो अस्त वलहीन हो तो न्याय से धन पाता है ।
गुरु नवम में सौम्य ग्रहों से दृष्ट हो तो अरिष्ट का नाश करता है । ददाम साच में ग्रहों का फल -
दशम में शनि-पशु धन नाशक ।
दशम में सूय मंगल-व्यापार उद्योग को करते है । दशम में शुभ ग्रह-राजसमागम सुख धन व पुत्र का सुख । दशम सूयं-राजा से लाभ, धन की प्राप्ति, सुवर्ण गौ भुमि.वस्त्र का लाभ, कायं सिद्ध हो, मान बढ़े, पशुओं के अंग में रोग वृद्धि । ॥ दशम चन्द्रमा-शत्रु का नाश, प्रतिष्ठा कीति वृद्धि, पुत्र और वस्त्र का लाभ, व्यापार में सुख, रोग नाश, मित्र व स्त्री का सुख, राजा से धन प्राप्ति । दशम मंगल” भाग्य का उदय, धन लाभ, प्रतिष्ठा, मान सुख, राजा की कृपा, व्यापार में लाभ, आरोग्यता, पशुओं की वृद्धि दशम बुध-वाहन का सुख पुत्र वृद्धि, धन लाभ, राजा से जय, भाइयों से सुख, भोग विलास, सत्कार, देह सुख बल कांति वृद्धि । दशम गुरु-राजा की प्रसन्नता, शत्रु नाश, .भूमि गौधन का लाभ, कीति, मान वृद्धि, चित्त में आनन्द, घर में महोत्सव, सुहृद का सुख, कमं का उदय । दशम शुक्र-राजा से मान, सववत्र जय गौ धन धान्य लाभ, खेती तथा वाहन से सुख, शत्रु नाश, कार्य सिद्धि, भाइयों से सुख, व्यापार में लाभ । दशम शनि-खेती से हानि, पशु का भय, अपने जनों में उदरपीड़ा, राजा से भय, स्थान हानि, व्यापार से लाभ, प्रवास, दुःख व्याकुलता, धने हानि । दशम राहु-वाहन नाश, भुमि खेती आदि का नाश, व्यापार से लाभ, अन्यः मत- मंगल कार्य हो, धन लाभ, स्वजनों से वैर । दशम केतु--च्यापार में लाभ, राजा से जय, वाहन की हानि, मंगल कार्यं हो । दशम सूर्य-वर्षेश सुर्यं नीच राशि का पाप युक्त ददाम में हो तो राजा से मृत्यु या बन्धन हो, जिसका जन्म कातिक में हो उसे यह योग हो सकता है। जन्म का सूर्य सिंह राशि में हो और वर्ष में बलवान होकर दशम में हो तो नवीन स्थान प्राप्ति ओर राजा का आश्रय भी होवे । जन्म में सुयं दशमेरा हो (जन्म लग्न वुर्चिक हो) और वषं में दशाम हो और लग्नेश