भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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  • : सहमेश का बल विचार : २२४

होकर सुख देता. है । यदि पापग्रहों से युक्त दृष्ट हो तो द्रव्य का नाश करता! है । यदि शत्रु ग्रह से युत दृष्ट हों तो शत्रु सम्बन्धी कमे से धन नाथ होता है। यदि पाप युक्त भौर शुभ दृष्ट हो और शुभ ग्रह के साथ इत्थदाली भी हो तो पूर्वं संचित धन का नाश करके पुनः अपने पुरुषार्थ से सुख पूर्वक' द्रव्य संचित करता है। केवल पाप युक्त दृष्टि से सवंथा घन नाश करता है । पुत्र सहम---यदि पुत्र सहम अपने स्वामी से या शुभ ग्रह से युक्त दृष्ट हो तो “पुत्र उत्पत्ति और उत्पन्न पुत्रों का सुख होता है । ऐसा ही फल शुभ ग्रह से मुयशिली होने से होता है । पुत्र सहम पाप युक्त और शुभ ग्रह से इत्यशाली हो तो प्रथम पुत्र सम्बन्धी दु ख और पश्चातु पुत्र सुख देता है। पहिले योग फल पीछे दृष्टि फल होता है। पुत्र सहम पाप युक्त दृष्ट हो और पाप ग्रह से इसराफ योग करता हो तथा पुत्र सहमेश निर्बछ अस्तंगत हो तो पुत्र का नाश होता है। ' i जो जन्म लग्न से पंचमेश है, - वह वर्ष में भी पंचमेश या पुत्र. सहमेश हो और शुभ ग्रह, स्वस्वामी, स्वमित्र से युक्त दृष्ट हो तो पुत्र प्राप्ति हो । र पितृ सहम--पितृ सहम शुभ ग्रह वा स्वस्वामी' युक्त दृष्ट और शुभ ग्रह से इत्थशाली हो तो पितृ सम्बन्धी धन वस्त्र मान सुख देता है । नर . यदि पितृ सहमेश अस्त हो निर्बल हो लग्न से अष्टम स्थान में हो, चर राशि में हो पापग्रह से मुशरिफ योग करता हो तो परदेश में जाकर पिता का नादा होता है । स्थिर राशि हो तो स्वदेश में पिता मरे । द : पितृ सहम स्वस्वामी से व शुभ ग्रह से इत्थशाली हो और पाप ग्रह से युक्त भी हो तो वर्ष के पूर्वाद्ध में रोग वृद्धि हो उत्तराद्ध में सुख हो । कल जव पितृ सहमेश पूर्ण बली १५ विश्वा से अधिक बल पाकर शुभ स्थान में ह्‌ तो राजा से मान तथा वंश की वृद्धि हो । र मातृ सहम में भी ऐसा ही: फल विचारना

बन्धन सहम--बन्धन सहम यदि अपने स्वामी का. शुभ ग्रह युक्त दृष्ट हो तो 'बन्धन (कारागार) आदि का भय नहीं होता । यदि बन्धन सहम या उसका स्वामी पाप युक्त दुष्ट हो या पाप ग्रह से इत्यशाल करता हो तो बन्धन होता है। यह फल भी विपरीत जानना ऐसा मतांतर है।

गौरव सहम--गौरव सहम स्वस्वामी या शुभ ग्रह युक्त दुष्ट हो तो सुख मिलता

हैं । राजा से सम्मान यश वस्त्र की प्राप्ति होती हैं। शुभ ग्रह से इत्यशाली भी हो

तो धन, वाहन यश और सुख मिलता है। यदि पाप ग्रह से युक्त दुष्ट या इत्यशाली हो तो पद (अधिकार) तथा घन और सुख नाश करता है ।

जो गौरव सहम शुभ पाप दोनों प्रकार के ग्रहों से युक्त या दुष्ट हो और पाप

ग्रह से इत्यशाली हो तो पूर्वाद्ध में धन तथा मान का नाश करता है.उत्तराद्ध में शुभ

फल देता है । सुख वाहन शस्त्र आदि लाभ हो । जो शुभ पाप ग्रह से युक्त होकर

शुभ ग्रह से इत्थश्चाली हो तो वर्ष के पूर्वाद्ध में शुभ, उत्त राद्धं में अशुभ फल देता है ।

सब ही प्रकार मिश्र हो तो सम्पूर्ण वर्ष में मिश्र फल देता है।

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