सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 234, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें४२६ : सवित्रे ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षे फल खण्ड
"कर्मे सहम--कर्म भाव, कर्म भावेश, कर्म सहम और कमं सहमेश ये चारों स्व
स्वामी, शुभ ग्रह युक्त दुष्ट तथा शुम ग्रह से इत्यशाली हों तो सुवर्ण वाहन भूमि
इन का लाभ देते हैं। १ ॥ ६
यदि पाप युक्त दृष्ट या पापंग्रह से इत्यशाली हों तो उपरोक्त फल का नाश
कर अशुभ फल देते हैं । है ! कहि है
पूर्वोक्त कर्मेभाव कर्मसहमेश पाप युक्त वा दृष्ट या पाप ग्रह से इत्यशाली हो
तो कर्म में. विकलता अर्थात् नष्ट करता है.। यदि शनि से युक्त या दृष्ट हो तो
विशेष करके कर्म का नाश करता है । इसी प्रकार इनके अस्तंगत तथा वक्री होने में
भी ये अशुभ फल देते .हैं।
राज्य सहमेश, कर्म भावेश, राज्य भावेश, कर्म सहमेश यदि पाप ग्रह से
मुंयश्िली .हो क्रूर युक्त दृष्ट हो तो राज्य नाश हो । पाप ग्रह से मुशरीफ हो तो भी
उपरोक्त फल हो सुवर्ण द्रव्य आदि का नाश हो. । ठ :
शुभ पाप के तुल्य़ योग दृष्टि वा मुशरीफ योग हो तो बलाबल विचार कर फल
कहना इसी प्रकार माता आदि सहम का विचार करना ।
सहम फल-सम्पूर्ण सहम शुभ योग या शुभ दृष्टि से सहमेश के बल के अनुसार
शुभ फल देते हैं । 0
दरिद्र, मृत्यु, मांद्य (रोग), कलह या शत्रु सहम ये ४ सहम विपरीत फल देते
हैं अर्थात् ये शुभ युक्त दृष्ट स्वामी बलवान हो तो विशेष अनिष्ट फल देते हैँ । तथा
ये पाप योग दृष्टि तथा सहमेश निर्वेल होने से नाम गुण के विपरीत शुभ फल देते
हैं । अनिष्ट बहुत थोड़ा होता है । इसलिए इन सहमों का उल्टा फल कहा है
जन्म, वर्ष और प्रश्न में सहम--जन्मपत्री हो तो जन्म और वर्ष का सहम
विचारंना । जन्मपत्री न हो तो.प्ररन छग्न से सहम का विचार करना । प्रश्न कर्ता
अनेक प्रश्न पूछते हैं इसलिए प्रश्न काल में भी अभीष्ट सहम का विचार कर फल
. का निर्णय करना । $
सहम के फल का समय जानना
(सहम स्पष्ट-पहमेश स्पष्ट)=राशि के अंस बना लेना (अंश कलादि > सहम
' राशि का स्वोदय)--३००दिन घटी पल प्राप्त दिनादि+ ३० मासादि फल ।
वर्ष प्रवेश सूर्य ‡- मासादि=इतने सूर्य होने पर फळ होगा ।
पुण्य सहम ८-१५०-२४'-२७' '=पुण्य सहम धन राशि पर
सहमेश गुरु ५-२-१८-३० है जिसका स्वोदय ३४० है
शेष=३-१३-५-५७
2८३० सटाणा ९० ।-१३--१०३०-५:-१७'
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