सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 24, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें१६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्ष फल खण्ड
जब दुसरा मास प्रवेश निकालना है तो गत मास १ हुआ। तो जन्म की सूर्ये
स्पष्ट की राशि में १ जोड़ना । जैसे जन्म का सूर्य १० रा०-१ ६०-५३/-५९” है +९'
गत मास (१ राशि जोड़ा )-११रा०-१ ६0-५३-५९” हो गया अर्थात्-पुर्य की राशिः
स्थान में मकर थी तो अब कुम्भ राशि हो गई परन्तु अंश आदिं वे ही रहे ।
दूसरे मास प्रवेश में=११ रा-१ ६०-५३-५९
तीसरे मास प्रवेश में०-१६-५३५%
चौथे मास प्रवेश में=१-१६-५३-५% इत्यादि
जन्म का सूर्य=१० रा-१ ६०-५३-५९”
+७ गत मास=७-०-०¬° =५-१६-५३-५९ यह आठवें माम का मास प्रवेश का सूर्य हुआ ॥
इस प्रकार प्राप्त सूर्य स्पष्ट जिस दिन जिस समय होगा वही समय मास प्रवेश
का होगा । उस समय की कुंडली यदि वना ली जाय तो वही कुंडली उस मास केः
प्रवेश की कुंडली कहलायगी । इस प्रकार १२ मास की १२ मास प्रवेश कुंडली वन
जाती है ।
मास लग्न का स्वामी मास पति ( मासेश ) होता है । उसके फल का भीः
विचार वर्षश के समान होता है ।
मास प्रवेश का समय निकालना
मास प्रवेश के समय का सूर्य स्पष्ट बनाने की जो ऊपर रीति बताई गई है, वह
सूर्य स्पष्ट किस समय पर किस वार घटी पल पर आयगा उसके निकालने की रीति
नीचे दी है ।
मास प्रवेश के सूर्य से मिलता-जुलता सूर्ये कब आता है यह पंचांग में देखो ।
जिस प्रकार ग्रह स्पष्ट करने के लिए पंक्ति खोजते हैं उसी प्रकार पंचांग में समीप
को पंक्तिस्थ ( पंचांग का ) सूयं और उसकी गति खोजकर लिख लो ।
मास प्रवेश के सूर्य से पंक्तिस्थ सूर्यं अल्प हो तो + (धन) अधिक हो तो--ऋण
चालन होता है । पंक्ति और मास प्रवेश के सूर्य का जो अन्तर ( चालन ) धन ऋण
आत्मक निकलता है उसकी विकला वना लो और पंक्तिस्थ सूर्य की गति की भी
विकला बना लो । उपरान्त अन्तर में गति का भाग दो तो उत्तर वार घटी पल
आदि में प्राप्त होगा । वह चालन # चालन ऊपर वताये अनुसार होगा ।
उस सूर्य की अमुक गति एक दिन में होती है तो प्राप्त अन्तर में गति मान
होने को कितने घटी पळ लगेंगे ? यह निकालने को अन्तर में गति का भाग देने से
जो दिन घटीपलादि निक्रलता है उसे पंक्तिस्थ वार घटी पल में £ करने से मास.
प्रवेश का समय निकलता है ।
अर्थात् मास प्रवेश के सूरये से पंक्ति का अन्तर निकालते समय देखना पंक्तिस्थ
सूर्यं का वार और मिश्र काल का घटी पल पंचांग देखकर लिख लेना चाहिए।
इतवार को एक वार गिनते हुए जो वार हो उतनी संख्या का वार और जो मिश्रम।न