सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 33, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंवपं में मुंथा साधन : २५
देना तो 7 चालन प्राप्त होगा ।
दिन प्रवेश का सूर्य और पंक्ति के सूर्य का अन्तर निकालना । जिसमें जो घट
सके उसे घटाना । पंक्ति से वार प्रवेश का सूर्य अधिक हो तो +कम हो तो-(ऋण)
चालन होता है । या वार प्रवेश से पंक्ति घट जावे तो +यदि पक्ति से वार प्रवेश
घट जावे तो चालून-(ऋण) होता है। इस चालन को पंक्ति की वार घटी पल में
ॐकरना तो दिन प्रवेश का समय निकल आता है । पक्ति का सूर्य जो लिया है उस
दिन का वार हुआ और पंक्ति का सूर्य स्पष्ट मिश्र काल या प्रातः का जिस प्रकार
दिया हो वह इष्ट घड़ी पल में हुआ । इसमें से चालन ॐ करना पड़ता है जैसा कि
ऊपर उदाहरण देकर वता चुके हैं ।
इसके उदाहरण और भी आगे दिये हैं ।
वषं प्रवेश साधन का समय अज्ञात हो तो कैसे जानना
जिसका जन्म समय ज्ञात न हो उसका वर्ष साधन प्रश्न पर से करते हैं ॥ उस
समय प्रश्न समय के लग्न को स्पष्ट करना और उसी लग्न कुण्डली से शुभाशुभ फल
बुद्धि से विचार कर कहना । जो प्रश्न लग्न है उसे वर्ष प्रवेश का लग्न समझना ।
वर्ष प्रवेश ७ जव प्रश्न समय के सूर्य के तुल्य अग्रिम वर्ष का सूर्य हो उसी समय वर्ष का
प्रवेश समझना । तात्कालिक लग्न और ग्रहों के अनुसार वर्ष में विचार कर शुभाशुभ
फल कहना ।
सुन्या जानना
प्रश्न छरन की राशि को छोड़कर अंश कला के समूह को १५० से भाग देना।
लब्धि राश्यादि फल प्रश्न लग्न से मुंथा की स्थिति होती है। या तात्कालिक प्रश्न
लग्न की ळला करके १५२ का जाग देना जो लब्धि होगी वह मेषादि से मुंबा जानना ।
अध्याय ४
(३) वर्ष में मून्था साधन
वर्ष का फल जानने एवं वर्षेश का निर्णय करने के लिए मुंथा निकालनी पड़ती है।
जन्म लग्न से प्रति वर्ष मुंया एक-एक राशि आगे चलती है। जन्म लग्न में
मानों मुंथा है तो एक वर्ष के उपरांत धन स्थान में फिर एक वर्ष के उपरांत सहज
भाव में इत्यादि प्रकार से मुंबा चलती है ।
मुंथा के भिन्न-भिन्न नामर्मुंथा, मुथहा, इंथा, अंथिहा आदि है ।