भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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वर्ष प्रवेश कृण्डली बनाने को ग्रह स्पष्ट : ३९.

(४) कोई भी अधिकारी वर्ष लर्न को न देखे तो उनमें से जन्म लग्न को देखने

वाला ग्रह वर्षेश हो जाता है ।

(५) यदि कोई ग्रह जन्म लग्न या वर्ष लग्न को भी न देखे तो मुंबेश चाहे वह

अति निर्वेल या अल्प बली हो तो भी वर्षश हो जाता है ।

(६) यदि लग्न पर किसी अधिकारी की दृष्टि न हो, वर्ष लग्न सम्बन्धी राशि,

जन्म लग्न में किसी अधिकारी की दृष्टि में हो तो वह वर्षेश हो जाता है ।

(७) चन्द्रमा वर्षेश नह हो सकता ।

(८) उपरोक्त निर्णय के अनुसार चन्द्र वर्षश आवे तो चन्द्र जिस ग्रह के साथ

इत्यशाल योग करता हो वही ग्रह वर्षेश होगा यदि किसी ग्रह के साथ चन्द्र का

इत्थशाल न हो तो वर्ष लग्न में जहां चन्द्रमा हो उस चन्द्र राशि का स्वामी वर्षश

होता है ।

मास प्रवेश और दिन प्रवेश में लघु पंचाधिकारी

जिस प्रकार वर्ष प्रवेश में पंचाधिकारी निकाल कर वेश निकालते हैं । उसी

प्रकार मास प्रवेश में ६ अधिकारी निकाल कर उसका मास पति चुना जाता है।

और दिन प्रवेशा में ७ अधिकारी निकाल कर दिन पति चुना जाता है।

वर्ष प्रवेश में मास प्रवेश के दिन प्रवेशा के तं का स्पष्टीकरण

५ अधिकारी ६ अधिकारी ७ अधिकारी अधिकारियों का स्पष्टीकरण

१ जन्म लग्नेश १ जन्म लग्नेश १ जन्म लग्नेश (१) जन्म की लग्न कुंडली में लग्न स्वामी

२ वर्ष लग्नेश २ वर्षे ,, २वर्ष ,, (२)वर्ष की ,, ती कद,

३ मास लग्नेश ३ मास ,, (३) मास की ,, 7

¥ दिन 11) (४) द्नि की 11 गा 3 31

३ मुंधेशा ४ मुंथेरा ५ मुंथेश (५) जिस राशि में मुंबा हो उसका स्वामी

४ त्रिराशीश ५ त्रिराशि पति ६ त्रिराहि प० (६) दिन रात्रि अनु. वर्ष रूग्त अनु. स्वा.

५ समय पति ६ समय पति ७ समय पति (७) वर्ष प्रवेश दिन का सूर्य रादीश

रात्रि का चन्द्र राशि पति

इनका उदाहरण आगे दिया है । वर्ष प्रवेश, मास प्रवेश और दिन प्रवेशा में भी

ग्रह स्पष्ट और भाव स्पष्ट करना पड़ता है । चलित ग्रह में पंचवर्गी बल और द्वादश

वर्मी बल साधन करना उपरांत पड़ेश ( मास के ६ अधिकारी ), सप्नेश ( दिन के

७ अधिकारी ) निकाल कर वेश, मासेश और दिनेश का चुनाव करना ।

इससे प्रगट हुआ कि वरषेंश आदि का चुनाव करने के लिए ग्रह मंत्री, ग्रह दृष्टि

और ग्रह बळ निकालने की आवश्यकता है। जिन सब के विचार के उपरांत वर्षेर

आदि का चुनाव होता है।