भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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वृहत्पंचवर्गी बल साधन : ७७

पंचाधिकारी मंत्री बल चक्र

स्थान. स्वस्थान मित्र क्षेत्री सम क्षेत्री शत्रु क्षेत्री

१ गृह वल ३०-० २२-३० १५- ० ७-३०

२ हृद्दावल १५-० ११-१९ ७-३० ३-४५

३ द्रेष्काण वल १०-० ७-३० ५-० २-३०

४ नवांश बल ५-० ३-४५ २-३० १-१५

५ उच्चवल २०-० बीच का अनुपात से निकलता है

इस मैत्री चक्र के अधिमित्र अधिशत्रु आदि नहीं दिया इससे तात्कालिक मैत्री के

अनुसार ही लोग बल निकाल कर चक्र में रख देते हैं । तात्कालिक मैत्री पहिले निकाल चुके हैं उसी के अनुकार बल निकाल कर नीचे

चक्र में दिया है ।

वृहत्पंचवर्गी बल चक्र

ग्रह सूये चंद्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि १ गृहेश गुरु बुध वुध गुरु शुक्र गुरु वुध सम सम मित्र सम सम सम मित्र

१५-० ` १५-० २३-३० १५-० १५-० १५-० २२-३० २ उच्च वल. १६-१० ३-४७ ३-५३ ०-१३ ९-५५ १८-५२ ७-२१

३ हद्देश शुक्र शनि मंगल बुध शनि बुध शनि

शत्रु शत्रु स्व. स्व. शत्रु शत्रु स्व,

३-४५ ३-४५ १५-० १५-० ३-४५ २३-४५ १५-०

४ द्रेष्काणेश शनि वुध सूर्यं गुरु चंद्र गुरु सूर्य

मित्र सम मित्र सम शत्रु सम मित्र

७-३० ५-० ७-३० ५-० २-३० ५-० ७-३०

५ नवांशे सूर्य वुध मंगल गुरु मंगल मंगल शुक्र

स्व सम स्व सम शत्रु मित्र भित्र

५-० २-३० ४-० २-३० १-१५ ३-४५ ३-४५

बरू योग ४७-२५ ३०-२ ५३-५३ ३७-४३ ३२-२५ ४६-२२ ५६-६

विधवा बल ११-५१ ७-३० १३-२८ ९-२५ ८-५ ११-३५ १४-१

(चतुर्थांश)

पंचवर्गो बल का स्पष्टीकरण

सूर्य गुरु के घर में है तो तत्काल मंत्री के अनुशार गुरु सूर्य का सम है। गृह में

सम का वल चक्रानुसार १९-० है। सूर्य शुक्र की हृददा में है जो उसका शत्रु है।

हदूदा में शत्रु का बल ३-४५ है । द्रेष्काणमें सूर्य शनि के द्रष्काण में है जो उसका

मित्र है । द्रेष्काण में मित्र वल ७-३० है। नवांश में सूर्यं अपने (स्व०) नबांश में

है। स्व नवांश का बल नवांश में ५ दिया है। उच्चबल पहिले ही निकाल चुके थे ।