भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

पृष्ठ 86, कुल 280 में से

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७८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

इन सव के बल का योग ४७-२५ हूभा । इसका चतुर्थांश ११-५१ विरवा बल

हुआ । इसी प्रकार प्रत्येक ग्रहों का बल यहाँ केवल तात्कालिक मैत्री के विचार से

उपरोक्त चक्र में दिया है।

कई ज्योतिषी स्थिर मैत्री के अनुसार पंचवर्गी बल साधन करते हैं। स्थिर(नेस￾एक मैत्री) पहिले दे चुके हैं ।

स्थिर मंत्री बल चक्त

स्व. मित्र शत्रु

गुह ३० १५ जा

हृददा ११ जा ३-४५

द्रेष्काण १० ५ २॥

नवांश ५ ३॥ १-१५

पंच बर्गी बल स्थिर मंत्री के अनुसार

ग्रह सूये चंद्र -मंगल दुध गुरु शुक्र ' शनि

(१) ग्रहेश गुरु वुध बुध गुर शुक्र गुरु दुभ

मित्र शत्रु शत्रु शत्रु शत्रु शत्रु मित्र

१५-० ७-३० ५-३० ७-३० ७-३० ७-३० १९-०९

(२) उच्च बल १६-१० ३-४७ ३-५३ ०-१३ ९-५५ १८-५२ ७-२१

(३) हृददेश शुक्र शति मंगल बुध शनि वुध शनि

शत्रु शत्रु स्व. स्व. शत्रु मित्र स्व.

३-४५ ३-४५ १५-० १५-२ ३-४५ ७-३० १५-०

(४) द्रेष्काणेश्च शनि वुध सुर्यं गुरु चंद्र गुरु सूर्य

हात्रु शत्रु मित्र शत्रु मित्र शत्रु: शत्रु

२-३० २-३० ५-० २-३० ५०० २-३० २-३०

(५) नवांशेश सूर्य बुध मंगल गुरु मंगल मंगल शुक्र

स्व. शत्रु स्वः दात्रु मित्र शत्रु मित्र

५-० १-१५ ५-० १-१५ २-३० १-१५ २-३०

बल योग ४२-२५ १८-४६ ३६-२३ २६-२८ २८-४० ३७-३७ ४२-२१

विश्वा बल १०-३६ ४-४१ ९-५ ६-३७ ७-१० ९-२४ १०-३५

( चतुर्याश ) स्थिर बल चक्र ( वृहत्पंचवर्गी बल निकालते के लिए )

ग्रह को रादि--मेष ०

अंश सुर्यं चंद्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि राहु

३-२० वरा ११॥ १६ ४ गा चा ४ ७!

६-० १२ ११ १५ ४। ११ १०। ४ ७।

६-४० ११ । १ पृथा शा पा ९ शा पा

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