सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 92, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें८४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड
राशि हो उस राशि के चक्र में उसके अंश के सामने और इष्ट ग्रह के नीचे जो वल
मिले उसे लेना । ग्रह की अंश कला वाई ओर चक्र में दिये अंश कला से अधिक न
हो उसी के भीतर हो ।
उदाहरण
१ सूर्यं ११-५०-३३'-मीन ११ के चक्र में १९-३३ (६९-४० के भीत र)=१०॥। वल
२ चंद्र ए-२८-४रेन्कन्या ५ राशि में २८-४९” (३००-०' के भीतर)=४॥। वल
३ मंगल २-२३-१५-मिथुन २ राशि में २३०-१५ (२३-२० के भीतर)=९ वल
४ बुध ११-१७-२०=मीन ११ के चक्र में १७-२ (१९-> के भीतर)-६॥ वरू
५ गुर ६- ५-४४-तुला ६ राशि के चक्र में ५-४४ (६-० के भीतर)>७॥ वल
६ शुक्र ११-१७-३६-मीन ११ राशि के चक्र में १७-३६(१९-० के भीतर)-९॥ बल
७ शनि २-२६-१४-मिथुन ३ राशि के चक्र में २६-१४(२६-४० के भीतर)-१०॥-०
बल मिलान सूर्य चन्द्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि
उपरोक्त चक्र से
प्राप्त वल वगा ४॥ ९ ध। छा ९॥ १०॥
पूर्व प्राप्त बल १०-३६ ४-४१ ९-५ ६-३७ ७-१० ९-२४ १०-३५
इस प्रकार स्थिर मंत्री द्वारा जो पंचवर्गी वल निकाल चुके हैं और चक्र हारा
जो स्थूल बळ प्राप्त हुआ है उसमें बहुत थोड़ा नाम मात्र को अन्तर आता है।
बल विचार ( वृहत्पंचवर्गी बल में ) नील कंठी मत से
ग्रह पूर्णं बली=१० विश्वा से अधिक पूर्ण बल=१५ से २० तक=अतिवली
ग्रह मध्य बली:-५ से १० विश्वा तक बल मध्यवल=१० से १५ तक=वरूवान
ग्रह नष्ट बली=५ से कम विश्वा बल हीन वलू=५ से १० तक=साधारण
निकृष्ट बल=१ से ५ तकऱवल हीन
अन्य मत से द्वादश वर्गी वल के विश्वा का विचार
( द्वादश वर्ग आगे दिया है )
पुर्ण बली=१२ विश्वा से अधिक
मध्य बली=६ से अधिक १२ से कम
अल्प बली=६ विएवा से कम
वर्षेश निर्णय के लिए लघु पंचवर्गी
अधिकारी जन्म वर्ष मुंधेश त्रिराशीश समयपति
लग्नेश छग्नेश
ग्रह बुध मंगल शनि शुक्र बुध
बल ९-२५ १३-२८ १४-१ ११-३५ ९-२५
लग्न पर दृष्टि ३४-३०” ० ० ३४-५४ ३४-२०
वर्षेश निर्णय *
- छर्न पर केवल बुध और शुक्र की दृष्टि है। शुक्र वुध एक स्थान में हैं परन्तु
|
| | | |
| | |