सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंद्वादशवर्गी बल साधन : ८९
चतुर्थांश होता है । दुसरा चतुर्थांश ४ राशि से आरम्भ होकर व तीसरा ७ राशि से और चौथा १० राशि से आरम्भ होकर आगे राशियो का क्रमानुसार चलता है । (५) पंचमांश-ए भाग, प्रत्येक ६° का ।
विषम राशि में ६० तक १२ तक १८तक २४तक ३० तक
मंगल शनि गुरु बुध शुक्र
सम राशि में शुक्र बुध गुरु शनि मंगल
विषम राशि का जो क्रम है उसके विरुद्ध क्रम से सम राशि में पंचमांश होता
है। जैसे मंगल, शनि, गुरु, बुध, शुक्र का विरुद्ध क्रम शुक्र बुध गुरु शनि मंगल है ।
(६) पष्ठांश-ह भाग, प्रत्येक ५° का
विषम राशि में-मेष से जैसे विषम में ५° तक १०० १५० २०० २५० ३०० तक
मेप वृष मिथुन ककं सिंह कन्या
सम ,, » उतुला से सम से तुला वृश्चिक धन मकर कुम्भ मीन
(७) सप्तमांश-डछ भाग, प्रत्येक ४९-१७ का विषम राशियों में उसी राशि से
गिनना सम राशि में उप्तसे सातवीं राशि से गिनना । जैसे सिह विषम राशि है तो
पहिला सिह से गिनकर आगे क्रमानुसार सप्तमांश होगा। कन्या सम है तो कन्या से
सातवीं मीन हुई तो कन्या का मीन से पहिला सप्तमांश आरम्भ होगा ।
(५) अष्ठमांशज्दै भाग, प्रत्येक ३-४५” का । चर राशियों में मेष राशि से
गिनना, स्थिर में धन से और द्वि स्वभाव में सिंह से गिनना । जैसे १, ४,७,१० चर
राशि का पहिला दूसरा वृष आदि। २, ५, ८, ११. स्थिर राशि का पहिल धन से
दूसरा मकर इत्यादि । ३, ६, ९, १२ द्वि स्वभाव का पहिला सिंह से दूसरा कन्या
से इत्यादि ।
(९) नवमांश=द भाग, प्रत्येक ३-२० का । १, ५, ९ राशि का मेष से पहिला,
२, ६, १० राशि का पहिला मकर से, ३, ७, ११ राशि का पहिला तुला से, ४, ८,
१२ राशि का पहिला कर्के से आरम्भ होता है । अर्थात् त्रिकोण की राशि पहिले चर
संज्ञक से गिनना । जैसे पहिला दूसरा तीसरा
१, ५, ९ राशि का ८ मेष वृष मिथुन इत्यादि
२, ६, १० ,, स् मकर कुम्भ मीन गो
३, ७, ११, = तुला वृद्चक धन "
४, ८५; १२, = ककं सिह कन्या
(१०) दश्षांशञदृङ भाग) प्रत्येक ३° का नील कण्ठी मत से--१, ७ राशि का
पहिला मेष से, २, ८ राशि का कुम्भ से, ३, ९ राशि का पहिला धन से, ४,१० का
तुला से, ५, ११ का सिह से, ६, १२ राशि का मिथुन से आरंभ होता है ।
(११) एकादशाँश=इई भागऱ्परत्येक २0-४३-३८” वर्दे का मेष से लेकर
क्रमानुसार सम्पूर्ण राशियों में यह भोगता है ।