सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 98, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें९० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड
(१२) द्वादशांशच्षर भाग, प्रत्येक २०-३०” का होता है । प्रथम द्वादशांश उसी
राशि से पहिले आरम्भ होता है और आगे क्रमानुसार चलता है ।
मतांतर---दशमाँश एवं एकादशांश में रीति--
(ग्रह स्पष्ट > १० दशमां)- १२ और (ग्रह स्पष्ट % ११ एकादशांश) + १२
शेष उस राशि का दशमांश या एक्रादशाँश की राशि होगी । शेष राशि के आगे अंश
भी दिया हो तो एक और वढ़ाकर राशि जानना ।
उदाहरण--
सूर्य स्पऽ्ट-११रा-५०-३३'-७” १२)१११-२५१(९
%दशांश का % १० १०८ यहाँ शेष ३ के आगे
१११-२५-३१-१० ३-२५ अंश भी है तो और जोडा ए
=४ ककं २४ राशि |
ताजिक नील कंठी में ६ से ११ तक का वर्गेश गणित द्वारा निकालना वताय। है-
रीति-ग्रह स्पष्ट की राशि अंश के अंश वनाकर अंश कला विकला लेना उसमें
जिस वर्ग का गणित करना हो उस अंक से गुणा कर ३० का भाग देना । रूब्धि में १
जोड़कर १२ का भाग देना । जो शेष रहे वही राशि का स्वामी वर्गेश होगा । जैसे-
सूयं ११-५०-३३'-७'”
~ ३०
३३० + ५८३३ ५९-३ ३-७
|! = ०३३-७ २०
WS १, न २६७- स्लब्धि ६७ + १=६८--१२= 07 ३२ ३०
२०१३-१०-४२ शेष ८ वुड्चिक य “
(२) सप्तमांश = ३३५-३३-७ २३४८ ५७ ३० 5७५ लब्धि ७८+ १८७९ - १२८
२३४८-५१-४९ शेष ७ तुला
(GH 5 ३९.३३९७ २६०४0४ व्य ८९. १०९०--१९०
< .] ३० ३०
२६८४-२४-५६ शेष ६ कन्या
(४) नबमांश = i उ ००३ २नलम्धि १००+ ११०१+ १२=
३०१९-१०-२३ शेष ५ सिंह
५) दशांश -३३-७ ७ ३३५-३६०७ ३३५-१११२५छग्घि १११ +१-११२--१२८ १८१० ३०
३२५५-३१-१० शेष ४ कके