भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

पृष्ठ 99, कुल 280 में से

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पृष्ठ 99

द्वादशवर्गी बल साधन : ९१

(६) एकादशांश > ३३५-३३-७ ३६९१... १_ र 2११ इ RR RR

३६९१-४-१७ शेप ४ ककं

(३२) द्वादशांश निकालने का भी गणित है।

ग्रह्‌ की राशि छोड़ अंशों में २॥ का भाग दो । देखो कुछ शेप वचा है या नहीं।

फिर लब्धि लो कुछ शेप वचा हो तो लब्धि में एक और जोड़ने से जो संख्या आवे

उस संख्या तक ग्रह की राशि से गिनने पर जो राशि आवे वही वर्ग की राशि होगी ।

जैसे सूयं ११रा-५०-३३'-७” है। अंश ५+ २॥>२ वार भाग गया आगे की

कलादि भी शेष वची है तो लब्धि २+ १=३, मीन का सूर्य था तो मीन से ३ गिना तीसरा वृष आया । वृष का द्वादशांश हुआ ।

दूसरा उदाहरण मंगल २रा-२३''-१५'-३” है । २३९-२॥ लब्धि ९+ १७१०

मिथुन का मंगंळ है । मिथून से १० गिना मीन का द्वादशांश आया ।

मतान्तर-जातक और ताजिक के वर्ग में अंतर है।

(२) होरा (७) सप्तमांश (९) नवमांश और (१२) द्वादशांश यहाँ चक्र में जो

दिया है वह जातक के अनुसार ही है: परन्तु (३) द्रेष्काण और (१०) दशमांश में

ताजिक में अंतर है।

जातक में पंचमांश, षष्ठांश, अष्टमांश और एकदशांश नह होता । द्वादश वर्गे चक्र दे चुके हैं।

द्वादश वर्गी बल साधन करने की रीति

आगे दिये हुए चक्र के अनुसार १२ वर्ग का.वर्गेश रिखने का एक चक्र बनाकर

यहाँ दिये हुए द्वादश वर्ग के चक्र के सहारे उनमें वर्गेश स्थापित करना । उपरांत

तात्कालिक मंत्री के आधार पर वर्गेश से जो मंत्री हो लिख देना । उस मैत्री के

अनुसार जो बल उस ग्रह को मिलता है नीचे लिख देता । अंत में सब वल का योग

कर उसमें १२ का भाग देने पर जो प्राप्त हो वह विदवावल होता है और उसे नीचे

रखना । वह वल मध्यम या श्रेष्ठ है उसका वल चक्र के अनुसार विचार कर लिख

देना । उस ग्रह के वर्गेश शुभ और ग्रह कितने हैं उनकी संख्या नीचे रिख देना । शुभ

ग्रह अधिक हों तो श्रेष्ठ, पाप ग्रह अधिक हों तो नेष्ट समझना ।

हादशवर्गी बल चक्र विइवाबल विचार

स्वराशि में मित्रग्ृही सम शत्रुगृही अल्पवली मध्यवली उच्चवली

बल २० १५ १० ५ ६ विश्वा से ६ से अधिक १२ से अधिक

कम १२ तक

जहाँ द्वादश वर्गी चक्र में केवल राशि दी है वह उस राशि का स्वामी ग्रह वर्गश्च

समझना । जैसे सूर्य ११-५0-३३/-७ है अर्थात्‌ मीन का ५९-३३ का चतुर्थाश

वर्ग देखना है। चक्र में १९-३३” यह पहिला चतुर्थांश ७०-६० के भीतर है। तो

७०-३० के सामने मीन के नीचे देखा १२ राशि दी है जिसका स्वामी गुरु है तो

वर्गेश गुरु हुआ । हे

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