श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)
Shrimad Bhagavad Gita Sadhak Sanjeevani
स्वामी रामसुखदास द्वारा
स्रोत: संवर्धित नब्बेवाँ संस्करण (90th Edition), गीता प्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस, गोरखपुर · 2008 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१२९० * साधक-संजीवनी-कोश *
जाके डर सुर ................................... १। १९
जाति पाँति कुल धर्म .......................... ९। ३३
जानि लखन सम ............................. १८। ७०
जासु सत्यता तें जड़ ................. १२। ३; १३। २८
जाहि न चाहिअ .............................. १८। ६६
जाहि लगन लगी ............................. १८। ६६
जित देखौं तित स्याममई ..................... ७। १९
जिन्ह कें रही भावना .......................... ७। २५
जिमि प्रतिलाभ ....................... ३। ३७; ७। २०;
....................................... १४। ७; १५। ५; १८। २७
जे ग्यान मान बिमत ........................... ९। ३१
जेन केन बिधि दीन्हें ......................... १७। २२
जो अपराधु भगत ............................... ४। ८
जो जाको शरणो गहें ......................... १८। ६६
जो दस बीस पचास ........................... ३। ३९
जौं नर होइ चराचर ........................... ७। १५
त
तजउँ न नारद ................................... ३। ८
तजि मद मोह कपट ........................... ७। १५
तदपि करहिं सम बिषम ....................... ९। २९
तन बिनु परस ................................ १३। १४
तारा बिकल देखि ............................. २। २७
तुम्हरिहि कृपाँ ....................... १०। १४; १५। २०
तेज कृसानु रोष ............................... ३। १६
त्यागी शोभा जगत में ......................... ४। १९
तेरे भावे जो करे ............................. १३। ८
द
दरिया दूषण दास ............................. ४। ११
दरिया हरि किरपा .............................. ४। ६
दुस्सासन की भुजा ............................. ४। ६
देस काल दिसि ............................... ३। २०
द्रुपद सुता निरबल ............................. ४। ६
ध
धर्म तें बिरति .......................... ३। १९; १५। ३
धर्मसील बिरक्त ................................ ७। ३
धान नहीं धीणों ........................ १६। ११; १८। १२
न
न कुछ हम हँसके सीखे ...................... १३। ७
नगन मूरति बाल गुपाल ...................... १८। ६६
नर तन सम नहिं ....................... ७। १९; ८। ६
नरक स्वर्ग अपबर्ग ................. ७। १९; ८। ६; १५। २
नवधा भगति कहउँ ..................... १६। ३; १८। ४७
नव महँ एकउ ................................. १६। ३
नाग असुर सुर .................................. ४। ६
नारायन बौरी भई डोलै ....................... १८। ६६
निज अग्यान राम पर ......................... १५। २०
निज इच्छाँ प्रभु ................................. ४। ९
निज प्रभुमय देखहिं....७। १९; १२। १३, १४, १५; १६। ३
निरखि निषादु नगर .......................... १८। ७०
निर्गुन रूप सुलभ ............................... ७। २
नीच नीच सब तर गये ....................... १८। ४५
प
पर दुख दुख........३। ३४; ५। १८; ६। ३२; १६। २
पर द्रोही पर दार ............................... ३। १६
पाग भाग वाणी ................................. १४। ४
पापवंत कर सहज ............................. १६। ७
पुरुष नपुंसक नारि ........................... १२। १४
प्रगट चारि पद ............................... १७। २२
प्रगट सो तनु ................................... २। २७
प्रारब्ध पहले रचा ............................ १६। ११
प्रेम भगति जल बिनु ... १२। २; १३। १८; १६। ३; १८। ५५
ब
बँध्यो बिषय सनेह ते ......................... ७। ३०
बरन धर्म नहिं आश्रम ........................ १७। २८
बरु भल बास नरक ........................... १६। १९
बहुरि बंदि खल गन ....................... १२। १३-१४
बिगरी जनम अनेक ........................... १५। ७
बिधि बस सुजन ............................... ६। ४०
बिना बिचारे जो करै ......................... १८। २५
बिनु पद चलइ ................................ १३। १४
बिप्र धेनु सुर .................................... ४। ९
बिषय करन सुर .............................. १३। १७
बुझै न काम अगिनि .......................... ३। ३७
भ
भए प्रगट कृपाला .............................. ४। ९
भगति पच्छ हठ करि ......................... १८। ६६