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भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

Shrimad Bhagavad Gita Sadhak Sanjeevani

स्वामी रामसुखदास द्वारा

स्रोत: संवर्धित नब्बेवाँ संस्करण (90th Edition), गीता प्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस, गोरखपुर · 2008 (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,299 पृष्ठ

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॥ श्रीहरिः ॥

श्रद्धेय स्वामी

रामसुखदासजी महाराजके महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ एवं शीघ्र

कल्याणकारी पुस्तकें

  • १-गीता-साधक-संजीवनी (हिन्दी-टीका) बृहदाकार, ग्रन्थाकार, मराठी, गुजराती, अंग्रेजी एवं बंगला अनुवाद भी
  • २-साधक-संजीवनी (परिशिष्ट)
  • ३-गीता-दर्पण—(हिन्दी, मराठी, बंगला, गुजराती)
  • ४-साधन-सुधा-सिन्धु
  • ५-गीता-ज्ञान-प्रवेशिका
  • ६-गीता-माधुर्य—(संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी, तमिल, कन्नड, मराठी, गुजराती, असमिया, उर्दू, नेपाली, बंगला, उड़िया)
  • ७-कल्याण-पथ
  • ८-जित देखुं तित तू
  • ९-भगवत्प्राप्ति सहज है
  • १०-सुन्दर समाजका निर्माण
  • ११-मानसमें नाम-वन्दना
  • १२-जीवनका कर्तव्य
  • १३-कल्याणकारी प्रवचन— (हिन्दी, अंग्रेजी, गुजराती, बंगला)
  • १४-नित्ययोगकी प्राप्ति
  • १५-भगवत्प्राप्तिकी सुगमता— (हिन्दी, अंग्रेजी, कन्नड)
  • १६-भगवान्से अपनापन
  • १७-वास्तविक सुख
  • १८-साधन और साध्य
  • १९-तात्त्विक प्रवचन— (हिन्दी, गुजराती)
  • २०-तत्त्वज्ञान कैसे हो?
  • २१-किसान और गाय
  • २२-जीवनोपयोगी प्रवचन
  • २३-जीवनका सत्य— (हिन्दी, अंग्रेजी)
  • २४-अमृत बिन्दु
  • २५-भगवन्नाम
  • २६-साधकोंके प्रति
  • २७-सत्संगकी विलक्षणता
  • २८-मातृशक्तिका घोर अपमान (तमिल, बंगला)

श्रीमद्भगवद्गीता

सा ध क

सं जी व नी

Code 6

श्रीमद्भगवद्गीता ग्रन्थमें इतनी विलक्षणता है कि अपना वास्तविक कल्याण चाहनेवाला किसी भी वर्ण, आश्रम, देश, सम्प्रदाय, मत आदिका कोई भी मनुष्य क्यों न हो, इस ग्रन्थको पढ़ते ही इसमें आकृष्ट हो जाता है। अगर मनुष्य इस ग्रन्थका थोड़ा-सा भी पठन-पाठन करे तो उसको अपने उद्धारके लिये बहुत ही सन्तोषजनक उपाय मिलते हैं। हरेक दर्शनकेअलग-अलग अधिकारी होते हैं, पर गीताकी यह विलक्षणता है कि अपना उद्धार चाहनेवाले सब-के-सब इसके अधिकारी हैं।