भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

Shrimad Bhagavad Gita Sadhak Sanjeevani

स्वामी रामसुखदास द्वारा

स्रोत: संवर्धित नब्बेवाँ संस्करण (90th Edition), गीता प्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस, गोरखपुर · 2008 (उद्गम)

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पृष्ठ 580

॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॥

अथाष्टमोऽध्यायः

अवतरणिका—

श्रीभगवान्ने सातवें अध्यायके अन्तमें अपने समग्ररूपका वर्णन करते हुए ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म, अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ—इन छः शब्दोंका प्रयोग किया और इस समग्ररूपको जाननेवाले योगियोंको अन्तकालमें अपनी प्राप्ति बतायी। इसको सुनकर इन छः शब्दोंको स्पष्टरूपसे समझनेके लिये अर्जुन आठवें अध्यायके आरम्भके ही श्लोकोंमें कुल सात प्रश्न करते हैं।

अर्जुन उवाच

किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम। अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥ १ ॥ अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन। प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः ॥ २ ॥

अर्जुन बोले—

पुरुषोत्तम= हे पुरुषोत्तम !प्रोक्तम्= कहा गया है ?देहे= देहमें
तत्= वह= औरकथम्= कैसे है ?
ब्रह्म= ब्रह्मअधिदैवम्= अधिदैवमधुसूदन= हे मधुसूदन !
किम्= क्या है ?किम्= किसकोनियतात्मभिः= वशीभूत अन्तः-
करणवाले
अध्यात्मम्= अध्यात्मउच्यते= कहा जाता है ?मनुष्यके द्वारा
किम्= क्या है ?अत्र= यहाँप्रयाणकाले= अन्तकालमें (आप)
कर्म= कर्मअधियज्ञः= अधियज्ञकथम्= कैसे
किम्= क्या है ?कः= कौन है ?ज्ञेयः= जाननेमें आते
अधिभूतम्= अधिभूत= और (वह)असि= हैं ?
किम्= किसकोअस्मिन्= इस

व्याख्या—‘पुरुषोत्तम किं तद्ब्रह्म’—हे पुरुषोत्तम ! वह ब्रह्म क्या है अर्थात् ‘ब्रह्म’ शब्दसे क्या समझना चाहिये ?

‘किमध्यात्मम्’—‘अध्यात्म’ शब्दसे आपका क्या अभिप्राय है ?

‘किं कर्म’—कर्म क्या है अर्थात् ‘कर्म’ शब्दसे आपका क्या भाव है ?

‘अधिभूतं च किं प्रोक्तम्’—आपने जो ‘अधिभूत’

शब्द कहा है, उसका क्या तात्पर्य है ?

‘अधिदैवं किमुच्यते’—‘अधिदैव’ किसको कहा जाता है ?

‘अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्’—इस प्रकरणमें ‘अधियज्ञ’ शब्दसे किसको लेना चाहिये। वह ‘अधियज्ञ’ इस देहमें कैसे है ?

‘मधुसूदन प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः’—हे मधुसूदन ! जो पुरुष वशीभूत