भारतकोश
समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

Samaj Se Prapt Brahmacharya

दादा भगवान द्वारा

स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

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किस समझ से विषय में... (खं-2-1)

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है। यदि शोक ही मिलता रहेगा, तो फिर वह चला जाएगा। वना जो चिपक गया है तो फिर वह छूटेगा ही नहीं न?

“एक विषय ने जीतता, जीत्यो सहु संसार, नृपति जीतता जीतिए, दल, पूर ने अधिकार ”

— श्रीमद् राजचंद्र

एक सिर्फ राजा को जीत लिया तो दल, नगर और अधिकार सबकुछ हमें मिल जाता है। उसकी पूरी सेना वगैरह सबकुछ मिल जाता है। सेना जीतने जाओगे तो राजा को नहीं जीत पाओगे। उसी तरह इस राजा (विषयरूपी) को जीत लिया कि सबकुछ अपने अधिकार में आ जाएगा। तभी तो हम मुक्त रहते हैं न! सिर्फ यह विषय ही ऐसा है कि जिसे जीतने पर सारा राज्य हाथ में आ जाएगा। हमें विषय का विचार तक नहीं आता।

टले ज्ञान और ध्यान...

“विषयरूप अंकुरथी, टले ज्ञान अने ध्यान, लेश मदिरापानथी, छाके ज्यम अज्ञान ”

— श्रीमद् राजचंद्र

एक ही बार यदि विषय भोगा तो सबकुछ बिगड़ जाता है। बाद में अनंत जन्मों का नुकसान होता है और नर्कगति का अधिकारी बनता है। कौन सा ऐसा विषय है कि जो नर्कगति नहीं दिलवाता? जो लोकमान्य है। कोई शादीशुदा ईंसान, उसकी स्त्री को लेकर जा रहा हो तो लोग आपत्ति उठाएँगे?

प्रश्नकर्ता : नहीं उठाएँगे।

दादाश्री : और शादीशुदा नहीं हो और जा रहा हो तो?

प्रश्नकर्ता : तो आपत्ति उठाएँगे।

दादाश्री : वह लोकमान्य नहीं कहलाएगा। वह नर्कगति का