समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य
Samaj Se Prapt Brahmacharya
दादा भगवान द्वारा
स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)
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समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य (पूर्)
दादाश्री : इसीलिए, वह शादी कर ले तो अच्छा है न!
प्रश्नकर्ता : नहीं, ऐसा नहीं चाहिए।
दादाश्री : ऐसा ही है न! यही तेरी कमजोरी है! आँख मारे, उसमें तुझे क्या? श्री विज्ञन से देख ले तो, क्या दिखेगा उसमें? तू श्री विज्ञन नहीं देखता?
माँ-बाप अगर तेरे ध्येय को बदलवा रहे हों तो तू वह नहीं सुनता तो मन की क्यों सुने? उठाकर ले गया कोई?
प्रश्नकर्ता : खुद ही खिंच गए।
दादाश्री : जो साँप के मुँह में जाए, उसका कोई क्या करे?
मन से कह देना कि 'तू अब फँसाएगा तो मैं आपत्तियों को सौ रुपये की आइस्त्रीम खिलाऊँगा या खाना खिलाऊँगा।' तो फिर नहीं करेगा वैसा। एक गलती पर सौ रुपया का दंड!
प्रश्नकर्ता : तभी अंदर हुआ कि यह गलत है, फिर भी उस ओर चला गया। मन का मान लिया उस समय।
दादाश्री : तो फिर अब गलत हुआ, वह जानता है। ऊपर से यह भी जानता है कि 'समुद्र में डूब जाऊँगा और मर जाऊँगा,' फिर भी यदि कोई जाए तो क्या समुद्र उसे मना करेगा? समुद्र तो कहेगा, 'आ भाई, मैं तो विशाल पेटवाला हूँ। कई लोगों को समा लिया है।'
प्रश्नकर्ता : पिछले एक साल से मैं रजिस्ट कर रहा था।
दादाश्री : मन तो बहुत मजबूत है, लेकिन तू खुद कमजोर होगा तो फिर से शादी कर लेगा।
प्रश्नकर्ता : जब ऐसा हो, तब मन मजबूत कहलाता है?
दादाश्री : इंसान कमजोर ही कहलाएगा न! मन कमजोर