भारतकोश
समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

Samaj Se Prapt Brahmacharya

दादा भगवान द्वारा

स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

पृष्ठ 194, कुल 482 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 194

विषय विचार परेशान करें तब... (खं-2-४)

१४१

नहीं कहलाता। बल्कि मन उसे खींच ले गया। मन तो मजबूत कहलाएगा।

प्रश्नकर्ता : इस केस में आपने मन को ‘मजबूत’ कहा और ईंसान को ‘कमजोर’ कहा। तो ईंसान यानी कौन कमजोर कहलाएगा?

दादाश्री : अहंकार और बुद्धि कमजोर हैं। इसमें असल गवर्नमेन्ट का राज है, तो इसमें बुद्धि और अहंकार हैं। इसमें अगर मन का राज हो जाए तो खत्म। मन का तो पार्लियामेन्टरी पद्धति से, उसका सिर्फ एक रोल ही है। वह भी अगर बुद्धि माने, स्वीकार करे, तब अहंकार दस्तखत करता है। बर्ना तब तक दस्तखत भी नहीं होते।

प्रश्नकर्ता : यों अकेले सो गए हों न, तो वे विचार फूटते हैं कि ऐसा हो जाए तो? इस तरह विषय भोंगें तो? फिर उस समय मुझे आश्चर्य होता है कि मुझे तो ब्रह्मचर्य पालन करना है तो यह सब फूटा कहाँ से? और अच्छे भी लगते हैं, वे विचार।

दादाश्री : फूटें उसमें हर्ज नहीं है, लेकिन वे तो तुझे अच्छे लगते हैं?

प्रश्नकर्ता : वे किसी को तो अच्छे लगते ही होंगे न अंदर?

दादाश्री : ओहो, तुझे किसी से लेना-देना है?!

प्रश्नकर्ता : वे जिसे अच्छे लगते हैं, उसे भी निकालना तो पड़ेगा न!

दादाश्री : उसे डॉटना, ‘यहाँ क्या हंगामा मचा रखा है हमारे घर में? हमारे पवित्र घर में, होम में?’

प्रश्नकर्ता : तो फिर इसका इलाज क्या है?

दादाश्री : तुझे इलाज करके क्या करना है?