समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य
Samaj Se Prapt Brahmacharya
दादा भगवान द्वारा
स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंनहीं चलना चाहिए, मन के कहे अनुसार (खं-2-५)
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तो बहुत डाउन ले जाएगा हमें! ऐसा नहीं कह सकते।
प्रश्नकर्ता : करूणा रखने जैसी नहीं है, वह डबल अहंकार कहलाएगा!
दादाश्री : अहंकार का सवाल नहीं है। 'करूणा रखने जैसी नहीं है।' ऐसा नहीं कहना चाहिए। वह हमें ऐसे नहीं कहता कि आप मुझ पर करूणा रखो। बल्कि वह तो कहेंगे कि, 'ओहोहो! बड़े आए करूणा रखनेवाले आए!' इसलिए सबकुछ गलत।
प्रश्नकर्ता : करूणा रखने का प्रयत्न ही नहीं होना चाहिए न?
दादाश्री : करूणा तो सहज स्वभाव है।
प्रश्नकर्ता : ऐसे जो प्रयत्न करने लगा, उसके रिएक्शन में 'नहीं रखने जैसा' हो गया न?
दादाश्री : वह तो गलत है। वह बात ही गलत है। करूणा कह ही नहीं सकते, हम। उसे अनुकंपा कहते हैं। करूणा तो, जब बुद्धि से आगे जाए, तब करूणा कहलाती है।
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