भारतकोश
समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

Samaj Se Prapt Brahmacharya

दादा भगवान द्वारा

स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

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[ ६ ]

‘खुद’ अपने आपको को डाँटना

खुद को डाँटकर सुधारे

प्रश्नकर्ता : आप से आज्ञा ली थी लेकिन फिर घर जाने के बाद जरा बिगड़ गया।

दादाश्री : अब क्या होगा? ऐसा हो गया फिर अलीखान क्या करे?!

प्रश्नकर्ता : ऐसा क्यों होता है? ऐसा होने का कारण क्या है?

दादाश्री : नासमझी है तुम्हारी। यहाँ से तय करके जाते हो कि मुझे घर जाकर दवाई पी लेनी है, लेकिन न पीए तो फिर अपनी नासमझी ही कहलाएगी न! देखो न, इस भाई ने डाँटा था अपने आपको, धमका दिया था। यह रो भी रहा था, और वह डाँट रहा था, दोनों देखने जैसी चीज थी।

प्रश्नकर्ता : एक बार दो-तीन बार चंद्रेश को डाँटा था, तब वह बहुत रोया भी था। लेकिन मुझे ऐसा भी कह रहा था कि ‘अब ऐसा नहीं होगा,’ फिर भी वापस हो ही जाता है।

दादाश्री : हाँ। वैसा होगा तो सही, लेकिन वह तो बार-बार कहते रहना है। हमें कहते रहना है और वह होता रहेगा। कहने से अपना जुदापन रहेगा। तन्मयाकार नहीं होंगे। जैसे पड़ोसी को डाँट रहे हों, उस तरह चलता रहेगा। ऐसे करते-करते खत्म हो जाएगा और सभी फाइलों खत्म हो जाएँगी न!