समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य
Samaj Se Prapt Brahmacharya
दादा भगवान द्वारा
स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें‘फाइल’ के सामने सख्ती (खं-2-९)
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है। अगर वह तोड़ नहीं सके तो उसका फ्रैक्चर कर देना पड़ता है, वहाँ वहेम डाल देना पड़ता है।
प्रश्नकर्ता : कोई एक जन फ्रैक्चर करे, लेकिन सामनेवाला नहीं करने देता उसे।
दादाश्री : सामनेवाले का ही फ्रैक्चर करना है। खुद का फ्रैक्चर नहीं करना है। सामनेवाला ही चिढ़ जाए कि बल्कि यह तो खराब निकला, बनावटी।
प्रश्नकर्ता : सामनेवाले को ऐसा लगना चाहिए कि इसने बनावट की।
दादाश्री : अगर ऐसा रह कि ‘यह टेढ़ा ही है’ तो दिनोंदिन उसके अभिप्राय टूटते ही जाएँगे। बाद में कुछ और ऐसी-वैसी सुना दे, तब तुम्हें छूटना हो तो छूटा जा सकेगा।
प्रश्नकर्ता : यदि खुद का ही पूरी तरह से फ्रैक्चर नहीं हुआ हो तो? खुद का मन पूरी तरह फ्रैक्चर नहीं हुआ हो तो?
दादाश्री : तो फिर कौन मना कर रहा है? तो फिर यह समुद्र नहीं है? डूब जाएगा।
प्रश्नकर्ता : पहले खुद का फ्रैक्चर हो जाना चाहिए न?
दादाश्री : खुद का करने की जरूरत नहीं है। पहले सामनेवाले का फ्रैक्चर कर देना, पूरा। बाद में जब तुम्हें खुद का करना होगा, तब हो सकेगा! जिसे यह करना है, उसका! पहले खुद का तो होगा ही नहीं न!
प्रश्नकर्ता : जब तक सामनेवाले का आकर्षण है, तब तक खुद का पहले नहीं हो सकता, ऐसा है?
दादाश्री : कभी भी नहीं हो सकता। यदि सामनेवाला गाली देना शुरू कर दे तो हमें जब छोड़ना हो तब छूट सकेंगे।